Advertisment

निजीकरण के खिलाफ दूसरे साल भी जारी रहेगा आंदोलन, बिजली कर्मियों को देश भर से मिला रहा समर्थन

Electricity Privatisation : पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का लगातार चल रहा आंदोलन शुक्रवार को दूसरे वर्ष में प्रवेश कर गया है।

author-image
Deepak Yadav
electricity privatisation

निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन करते बिजली कर्मचारी Photograph: (YBN)

लखनऊ, वाईबीएन संवाददाता। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का लगातार चल रहा आंदोलन शुक्रवार को दूसरे वर्ष में प्रवेश कर गया है। कर्मचारी विगत 366 दिन से रोजाना प्रदर्शन कर रहे हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि देशव्यापी समर्थन के चलते  बिजली कर्मी, किसानों और उपभोक्ताओं के साथ आंदोलन दूसरे वर्ष भी निजीकरण रद्द होने तक जारी रखेंगे।

नियामक आयोग ने घाटे झूठे आंकड़ें खारिज

समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने ऊर्जा निगमों के घाटे के झूठे आंकड़ों के आधार पर प्रदेश के 42 जनपदों का निजीकरण करना चाहता है। विद्युत नियामक आयोग ने उसके आंकड़ों को खारिज कर दिया है। ऐसे में निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट स्वतः अवैध हो जाता है। उन्होंने विद्युत नियामक आयोग से आरएफपी डॉक्यूमेंट को निरस्त कर तत्कालीन निदेशक वित्त और पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की।

आंदोलन तेज करने का अगले सप्ताह होगा ऐलान

दुबे ने कहा कि संघर्ष के दूसरे वर्ष में आंदोलन तेज करने का ऐलान अगले सप्ताह किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आज लगातार 366वें दिन बिजली कर्मियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में विरोध प्रदर्शन किया।

VKSSSUP | Electricity Privatisation 

यह भी पढ़ें- बिजली दरों पर नियामक आयोग का बड़ा ​फैसला, कंपनियों को सही आंकड़ों के साथ नया टैरिफ दाखिल करने का आदेश

Advertisment

यह भी पढ़ें- लखनऊ के इन इलाकों में आज कटेगी बिजली, कई ट्रेनों के बदले गए प्लेटफार्म

यह भी पढ़ें- चार माह से नहीं मिला वेतन : बिजली संविदा कर्मियों का उपकेंद्र पर प्रदर्शन, प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

Electricity Privatisation VKSSSUP
Advertisment
Advertisment