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Agaaz e moharram
YBN PALAMU:-
मुसलमान इस महीने की दसवीं तारीख को इस्लाम मजहब के बानी (प्रवर्तक) पैंगबर हजरत मोहम्मद सल्ललाहो अलैही वसल्लम के नवासे (नाती) हजरत इमाम हुसैन आली मुकाम व उनके सगे संबंधियों व समर्थकों को कर्बला के मैदान में शहीद किया गया था। शहीदान-ए-कर्बला की याद में मोहर्रम की 10 तारीख इस बार 6 जुलाई होगी। मोहर्रम की 10 तारीख को यौम-ए- आशुरा कहते हैं। मालूम हो कि मोहर्रम इस्लामिक कलैंडर का पहला महीना है। गुरूवार की शाम इस्लामिक वर्ष के आखिरी महीना जिलहिज्जा की 29 तारीख को मुसलमानों ने नए साल के पहला महीना मोहर्रम का चांद देखा। 27 जून मोहर्रम माह की पहली तारीख हुई। वैसे मोहर्रम की 10 तारीख यौम-ए-आशुरा की इस्लामिक इतिहास में बड़ी अहमीयत है। इसी दिन आसमान, जमीन ,कलम व सबसे पहले पैगंबर हजरत आदम अलैहिस्सलाम पैदा किए गए। इसी दिन हजरत आदम अलैहीस्सलाम की तौबा कबूल की गई। पैगंबर हजरत इद्रीस अलैहीस्सलाम
का आसमान पर उठाया गया। पैगंबर हरजत नूह अलैहिस्सलाम की किश्ती (नाव) को सैलाब से किनारा मिला था। पैगंबर इब्राहीम अलैहीस्सलाम पैगंबर को खलील उल्लाह बनाया गया और आग गुले गुलजार हुई। हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम के पैदाईश हुई। पैगंबर हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम को कैद खाना से आजादी मिली। इसी दिन इन्हें मिश्र देश की हुकूमत मिली। हजरत मुसा अलैहीस्सलाम पर तौरेत नाजिल हुई। इसी हजरत मुसा इसी दिन दरिया पार कर गए और जालिम बादशाह फिरोन का लश्कर दरिया नील में डूब गया। हजरत अय्यूब हजरत अलैहिस्सलाम को हर बीमारी से शफा मिली। हजरत यूनुस अलैहिस्सलाम 40 दिन मछली के पेट में रहने के बाद बाहर निकले। इसी दिन इनके कौम की तौबा कबूल की। इसी के साथ कई अहम वाकयात रूनुमा हुए थे ।
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