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पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश ने एक किशोरी को अगवा व दुष्कर्म के 11 साल पुराने मामले में एक आरोपी को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने उस पर 50 हजार रुपये की धनराशि अदा करने का आदेश दिया है। दोषी के सहआरोपी उसके भाई को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
पुलिस को छानबीन के दौरान किशोरी मिल गई
साल 2014 में एक महिला ने सिविल लाइंस थाने पर बेटी के अगवा की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें बताया था कि क्षेत्र के गांव बरसुनिया का राजेंद्र एक मंदिर का पुजारी था। पुजारी होने के चलते उसका घर पर आना जाना था। 14 जुलाई 2014 को राजेंद्र उनकी बेटी (15) को बहलाकर फुसलाकर अगवा कर ले गया। जिसमें उसके परिवार के लोगों ने साथ दिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस को छानबीन के दौरान किशोरी मिल गई।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी राजेंद्र व उसके भाई मटरू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। किशोरी ने कोर्ट में राजेंद्र के खिलाफ दुष्कर्म के बयान दर्ज कराए। इसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। मंगलवार को न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी। साक्ष्यों का अवलोकन किया। जिसमें न्यायाधीश ने किशोरी के अगवा व दुष्कर्म के आरोपी राजेंद्र को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने राजेंद्र को 20 साल के कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माने की धनराशि अदा करने की सजा सुनाई गई। न्यायाधीश ने राजेंद्र के भाई मटरू को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।