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आईवीआरआई के रिटायर्ड वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर 1.29 करोड़ की साइबर मामले में लखनऊ की रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी के निदेशक पूर्व सैन्यकर्मी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इनमें से दो आरोपी लखनऊ के और एक बरेली का निवासी है। पुलिस को तीन मोबाइल, आधारकार्ड, पैनकार्ड और क्रिप्टो वॉलेट मिला है।
एसपी क्राइम मनीष कुमार सोनकर ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट मामले में जेल भेजे गए ठगों से मिली जानकारी व खातों की जांच के आधार पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने लखनऊ एसटीएफ की मदद से बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ के थाना पीजीआई निवासी सेवानिवृत्त प्रदीप कुमार सिंह, थाना वजीरगंज निवासी महफूज और बरेली के थाना बारादरी निवासी अमान को गिरफ्तार किया है। वैज्ञानिक से ठगी के दौरान एक करोड़ दस लाख रुपये प्रदीप कुमार की कंपनी के खाते में डाली गई। उस कंपनी के खाते से 121208 रुपये अमान खान के खाते में व 100076 रुपये महफूज के खाते में ट्रांसफर कराए गए। तीनों ठगों को सीजेएम कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
साइबर थाना पुलिस के मुताबिक लखनऊ के थाना पीजीआई के 146 सेक्टर 6 सी गोपालकुंज निवासी प्रदीप कुमार सिंह सेना से रिटायर कर्मी है और लखनऊ में प्रापर्टी का काम करता है। उसकी कंपनी श्री नरायनी इन्फ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ के खाते में ठगी की सबसे बड़ी रकम 1.10 करोड़ ट्रांसफर की गई थी। यह कंपनी का चालू खाता था। दरअसल बचत खाते में बड़ी रकम अचानक पहुंचने पर बैंक प्रबंधन को शक हो जाता है और ऐसे खाताधारक नजर में आ जाते है। इसलिए साइबर ठग बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए फर्म या कंपनी के चालू खातों का इस्तेमाल करते हैं। इसके बदले फर्म के मालिकों और को ठगी की रकम में हिस्सा दिया जाता है। वैज्ञानिक के मामले में भी ऐसा ही हुआ। प्रदीप के खाते से रकम क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश व देश के अलग हिस्सों में बैठे साथियों के क्रिप्टो वॉलेट में भेज दी गई। ठगों ने इसके लिए बाइनेंस एक्सचेंज के खाते का इस्तेमाल किया। प्रदीप ने ठगी के लिए बोगस फर्म बनाई या सच में वह रियल स्टेट का काम कर रही थी, इसकी जांच की जा रही है। प्रदीप की फर्म से एक महिला समेत अन्य लोग भी जुड़े हैं, उनकी भी जांच की जा रही है। वहीं अमान से जानकारी ली गई कि उसने कितने शहरवासियों के खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराए हैं।
वैज्ञानिक का डाटा ठगों तक पहुंचाने वालों की तलाश
वैज्ञानिक के पास इतनी बड़ी रकम होने की जानकारी साइबर ठगों तक कैसे पहुंची, यह बड़ा सवाल साइबर क्राइम पुलिस के सामने आ रहा है। साइबर ठग तभी किसी को निशाना बनाते हैं जब उनको शिकार के पास बड़ी रकम होने और उनकी गतिविधियों की पूरी जानकारी होती है। वैज्ञानिक को रिटायर होने के बाद बड़ी रकम मिली थी और वह जल्द ही बरेली छोड़कर अपने पैतृक घर पश्चिमी बंगाल के हुगली में शिफ्ट होने वाले थे। वह आसानी से झांसे में आ जाएंगे, इसकी भनक साइबर ठगों को पहले से थी। वैज्ञानिक मामले में डाटा पहुंचाने वालों पर शिकंजा कसा जा सकता है। एसपी क्राइम बरेली मनीष कुमार सोनकर ने बताया कि वैज्ञानिक से ठगी मामले में नौ लोगों को जेल भेजा जा चुका है। आगे भी अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी जारी रहेगी। ठगी की रकम में से आठ लाख से ज्यादा राशि फ्रीज करा दी गई है।