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राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा ने बुधवार को सर्किट हाउस सभागार में मोबाइल कोर्ट लगाई। इसमें 106 दिव्यांगजन आए। 44 लोगों ने विभिन्न विभागों से जुड़ी मांगों को रखा। इसके अलावा अन्य दिव्यांगजन ने सरकारी नौकरी व अन्य मांगें रखीं। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को अस्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी न करने के लिए चेताया।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के बारे में बताया
दिव्यांगजन ने आवास, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, दिव्यांग पेंशन, बच्चों की निशुल्क शिक्षा, अंत्योदय कार्ड जैसी मांगें रखीं। आयुक्त ने समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। आयुक्त ने पूर्व में जारी अस्थाई दिव्यांगता प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दोबारा जांच कर पात्रों को स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र देने और भविष्य में अस्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी न करने के लिए चेताया। इस मौके पर उपायुक्त दिव्यांगजन शैलेंद्र सोनकर ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के बारे में बताया। जानकारी दी कि इस एक्ट में मोबाइल कोर्ट को सिविल कोर्ट की शक्तियां प्राप्त हैं।
कोर्ट के आदेशों का पालन न करने पर पहली बार में 10 हजार, दूसरी बार में 50 हजार और तीसरी बार में पांच लाख तक का जुर्माने का प्रावधान है। अगर सामान्य व्यक्ति भी सेवा में रहते हुए किसी भी कारण से दुर्घटना से दिव्यांग होता है तो उसे सेवा से हटाया नहीं जा सकता। इस अवसर पर सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह, नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री और सभी तहसीलों के एसडीएम भी थे। आयुक्त ने अधिकारियों को अपने विभाग से संबंधित योजनाओं का लाभ दिव्यांगजन तक पहुंचाने के लिए शिविर लगाने के लिए कहा।