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आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले RJD के नेता तेजस्वी यादव ने पार्टी की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। इस बार सीट बंटवारे को लेकर नया राजनीतिक फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है, जिसमें जातिगत संतुलन और घटक दलों की परफॉर्मेंस दोनों को प्रमुखता दी जा रही है।
कांग्रेस को झटका, लेफ्ट को बढ़त
पिछली बार कांग्रेस को 70 सीटें दी गई थीं, लेकिन वह महज 19 पर जीत सकी। वहीं लेफ्ट दलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। यही कारण है कि इस बार कांग्रेस को 50 से कम सीटें मिल सकती हैं और लेफ्ट को 25 से ज्यादा। तेजस्वी यादव ने इस बार संकेत दिया है कि "परफॉर्मेंस बेस्ड" सीट बंटवारा होगा। यानी जो पार्टी ज़मीनी स्तर पर सक्रिय है, उसे ही टिकट का हिस्सा मिलेगा।
जातिगत समीकरणों का बारीकी से विश्लेषण
बिहार की राजनीति जातीय आधार पर चलती रही है और तेजस्वी इसे बखूबी समझते हैं। इस बार वे मुसहर, पासी, दलित, महादलित, पिछड़ा-अतिपिछड़ा समाज पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। तेजस्वी यादव लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं, वहां की जातिगत संरचना का अध्ययन कर रहे हैं और स्थानीय कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर टिकट वितरण का खाका तैयार कर रहे हैं।
मुकेश सहनी और पशुपति पारस की मांगों से पेंच
VIP पार्टी के मुखिया मुकेश सहनी 60 सीटें और डिप्टी सीएम पद की मांग कर रहे हैं। उन्होंने खुद पटना, दरभंगा, चंपारण जैसी सीटों की सूची भी सौंपी है। वहीं पशुपति कुमार पारस की पार्टी की भी एंट्री तय मानी जा रही है। इन नई एंट्रियों के चलते RJD को अपने खाते में से आरक्षित सीटें भी रखनी होंगी ताकि किसी भी संभावित गठबंधन को एडजस्ट किया जा सके।
जाति के हिसाब से टिकट वितरण की संभावनाएं
जाति वर्ग | संभावित टिकट (%) |
---|---|
यादव | 20-25% |
दलित/महादलित | 20% |
मुस्लिम | 15-18% |
पासी/मुसहर/अन्य | 10-12% |
राजपूत, भूमिहार आदि | 10-12% |
अन्य पिछड़ा वर्ग | 15-18% |
तेजस्वी की नई रणनीति: पार्टी को युवा और जमीनी कार्यकर्ताओं से जोड़ना
तेजस्वी यादव सिर्फ जाति और पार्टी गठजोड़ पर ही नहीं, बल्कि पार्टी को सोशल मीडिया और ग्रासरूट लेवल पर मजबूत बनाने में भी लगे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे अपने काम को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रमोट करें, ताकि जनता को RJD की मेहनत और विकास दिखे।