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MSMEs को मिली बंपर बिक्री, क्या एक्सपोर्टर्स पर पड़ी दोहरी मार?

Q1FY26 में 50% से अधिक विनिर्माण MSMEs ने बिक्री वृद्धि दर्ज की, लेकिन निर्यातकों को टैरिफ से नुकसान हुआ। SIDBI सर्वेक्षण से घरेलू बाजार में उछाल और वैश्विक व्यापार चुनौतियों की दोहरी तस्वीर सामने आई।

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Ajit Kumar Pandey
MSMEs को मिली बंपर बिक्री, क्या एक्सपोर्टर्स पर पड़ी दोहरी मार? | यंग भारत न्यूज

MSMEs को मिली बंपर बिक्री, क्या एक्सपोर्टर्स पर पड़ी दोहरी मार? | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)

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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में शानदार बिक्री वृद्धि दर्ज की है। SIDBI के सर्वेक्षण से पता चला है कि 50% से अधिक विनिर्माण MSMEs ने इस तिमाही में अपनी बिक्री में इजाफा देखा है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

लेकिन, क्या यह खुशी सभी के लिए है? रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि टैरिफ और वैश्विक चुनौतियों के कारण निर्यातकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि कहां सफलता मिल रही है और कहां अभी भी चुनौतियां बरकरार हैं।

SIDBI (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) द्वारा जारी सर्वेक्षण, MSME Pulse, के अनुसार, विनिर्माण MSMEs का आधे से अधिक हिस्सा, विशेष रूप से घरेलू बाजार पर केंद्रित, अपनी बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज कर रहा है। यह दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग मजबूत बनी हुई है और छोटे उद्यम इसका लाभ उठा रहे हैं। कई छोटे व्यवसायों ने नए उत्पादों और सेवाओं को पेश किया है, जिससे उनकी बाजार हिस्सेदारी बढ़ी है।

क्या यह वृद्धि सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित है, या ग्रामीण इलाकों में भी इसका असर दिख रहा है? रिपोर्ट बताती है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित MSME इकाइयाँ भी इस वृद्धि का हिस्सा बन रही हैं, जो समावेशी आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

निर्यातकों के सामने नई दीवार: टैरिफ और वैश्विक चुनौतियां

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जहां एक ओर घरेलू बिक्री में उछाल है, वहीं निर्यात करने वाले MSMEs के लिए राह थोड़ी कठिन है। सर्वेक्षण के अनुसार, इन उद्यमों को विभिन्न देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण निर्यात में कमी का सामना करना पड़ रहा है। यह वैश्विक व्यापार युद्धों और संरक्षणवादी नीतियों का सीधा परिणाम है, जो छोटे निर्यातकों पर भारी पड़ रहा है।

यह स्पष्ट है कि MSME क्षेत्र एक दोहरी तस्वीर पेश कर रहा है। घरेलू बाजार में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद जगाता है, लेकिन निर्यात मोर्चे पर चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार और वित्तीय संस्थानों को उन MSME इकाइयों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है जो निर्यात पर निर्भर हैं। उन्हें टैरिफ राहत, निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं और वैश्विक बाजारों तक पहुंच के लिए समर्थन की आवश्यकता हो सकती है।

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