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Photograph: (Google)
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। अमेरिका द्वारा भारत के सामान पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद भारत सरकार ने अमेरिकी स्टेल्थ फाइटर जेट एफ-35 की खरीद को पूरी तरह नकार दिया है। भारत अब केवल आयात नहीं बल्कि मेक इन इंडिया फोकस के साथ ही रक्षा सौदे करेगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने अमेरिका को सूचित कर दिया है कि वह निकट भविष्य में किसी भी बड़े रक्षा सौदे को अंतिम रूप नहीं देने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, भारत ऐसी रक्षा खरीद में तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त निर्माण और स्वदेशीकरण को प्राथमिकता दे रहा है। भारत का फोकस अब आत्मनिर्भरता की दिशा में है।
एफ-35 फाइटर जेट क्यों है खास?
1.स्टेल्थ तकनीक: एफ-35 आवाज की गति से भी तेज (1.6 मैक यानी लगभग 1930 किमी/घंटा) उड़ान भर सकता है और दुश्मन के रडार में आसानी से नहीं आता।
2.एडवांस्ड सेंसर: लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित इस विमान में ऐसे सेंसर हैं जो हमले का तुरंत पता लगाकर रिएक्ट कर सकते हैं।
3.नेटवर्क बेस्ड वार: एफ-35 में एक ऐसा नेटवर्क सिस्टम है जो जमीन व आसमान के दूसरे विमानों को लाइव डाटा साझा करता है।
4.एडवांस हथियार: इसमें एयर-टू-एयर मिसाइलें, एयर-टू-ग्राउंड बम और 25 मिमी की तोप शामिल है। एफ-35ए को परमाणु हथियार ले जाने की भी अनुमति है।
5.स्मार्ट हेलमेट सिस्टम: पायलट को 360 डिग्री दृश्य, नाइट विजन और नियंत्रण सभी हेलमेट पर ही दिखते हैं।
2.एडवांस्ड सेंसर: लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित इस विमान में ऐसे सेंसर हैं जो हमले का तुरंत पता लगाकर रिएक्ट कर सकते हैं।
3.नेटवर्क बेस्ड वार: एफ-35 में एक ऐसा नेटवर्क सिस्टम है जो जमीन व आसमान के दूसरे विमानों को लाइव डाटा साझा करता है।
4.एडवांस हथियार: इसमें एयर-टू-एयर मिसाइलें, एयर-टू-ग्राउंड बम और 25 मिमी की तोप शामिल है। एफ-35ए को परमाणु हथियार ले जाने की भी अनुमति है।
5.स्मार्ट हेलमेट सिस्टम: पायलट को 360 डिग्री दृश्य, नाइट विजन और नियंत्रण सभी हेलमेट पर ही दिखते हैं।
एफ-35 के वेरिएंट और कीमत
F-35A: वायुसेना के लिए, कीमत करीब 8 करोड़ डॉलर
F-35B: थलसेना के लिए, शॉर्ट टेकऑफ और वर्टिकल लैंडिंग सिस्टम, कीमत करीब 10 करोड़ डॉलर
F-35C: नौसेना के लिए, एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशन हेतु, कीमत 9–10 करोड़ डॉलर
F-35B: थलसेना के लिए, शॉर्ट टेकऑफ और वर्टिकल लैंडिंग सिस्टम, कीमत करीब 10 करोड़ डॉलर
F-35C: नौसेना के लिए, एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशन हेतु, कीमत 9–10 करोड़ डॉलर
रूस का एसयू-57ई बना विकल्प
भारत को रूस की ओर से SU-57E फाइटर जेट की पेशकश मिली है। खास बात यह है कि रूस ने इस जेट का भारत में निर्माण करने के साथ ही 60% स्वदेशी पुर्जे और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पेशकश की है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), नासिक में इसका उत्पादन प्रस्तावित है। भारत इस विमान में देशी मिसाइलें और सिस्टम जोड़कर इसे अपनी जरूरतों के हिसाब से ढाल सकेगा।
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