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ED की छापेमारी से खुला चंडीगढ़ का कॉल सेंटर रैकेट : कैसे 'टेक सपोर्ट' के नाम पर विदेशियों से ठगे करोड़ों?

चंडीगढ़ में ED ने अवैध कॉल सेंटरों का पर्दाफाश किया, जो विदेशी ग्राहकों को फर्जी टेक सपोर्ट के नाम पर ठग रहे थे। कॉल रिकॉर्डिंग से टेक धोखाधड़ी और स्पूफिंग का खुलासा हुआ। अब इन अवैध कॉल सेंटरों के डायरेक्टर्स पर कानूनी शिकंजा कस रहा है।

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Ajit Kumar Pandey
ED की छापेमारी से खुला चंडीगढ़ का कॉल सेंटर रैकेट : कैसे 'टेक सपोर्ट' के नाम पर विदेशियों से ठगे करोड़ों? | यंग भारत न्यूज

ED की छापेमारी से खुला चंडीगढ़ का कॉल सेंटर रैकेट : कैसे 'टेक सपोर्ट' के नाम पर विदेशियों से ठगे करोड़ों? | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)

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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । आज गुरूवार 24 जुलाई 2025 को चंडीगढ़ ट्राइसिटी में चल रहे अवैध कॉल सेंटरों पर ED ने बड़ी कार्रवाई की है। ये कॉल सेंटर फर्जी टेक सपोर्ट के नाम पर विदेशी ग्राहकों को लाखों का चूना लगा रहे थे। जांच में खुलासा हुआ कि कॉल सेंटर के डायरेक्टर बिना लाइसेंस के स्पूफिंग गतिविधियों में शामिल थे।

चंडीगढ़ ट्राइसिटी में ऐसे ही एक डरावने सच का खुलासा हुआ है, जहां ईडी ने कई अवैध कॉल सेंटरों पर छापा मारा है। ये कॉल सेंटर विदेशों में बैठे मासूम लोगों को टेक सपोर्ट के नाम पर ठग रहे थे। सोचिए, एक फर्जी कॉल और आपके बैंक अकाउंट से लाखों रुपये गायब!

करोड़ों की धोखाधड़ी, बेनकाब हुआ ‘टेक सपोर्ट’ का खेल

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरूवार 24 जुलाई 2025 को चंडीगढ़, मोहाली और पंचकुला के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इन छापों में ऐसे कॉल सेंटर सामने आए, जो खुद को प्रतिष्ठित टेक कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर विदेशी ग्राहकों को निशाना बना रहे थे। ये ठग इतने शातिर थे कि उन्होंने एक पूरा इकोसिस्टम तैयार कर रखा था। उनका मकसद सिर्फ एक था – भोले-भाले विदेशियों को डराकर उनसे पैसे ऐंठना। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आपकी एक छोटी सी तकनीकी समस्या कैसे एक बड़े वित्तीय घोटाले में बदल सकती है?

कैसे बिछाया जाता था धोखाधड़ी का जाल?

ईडी की जांच में सामने आया है कि इन अवैध कॉल सेंटरों के कर्मचारी फर्जी पॉप-अप संदेशों, ईमेल या विज्ञापनों का उपयोग करते थे। इन संदेशों में अक्सर दावा किया जाता था कि ग्राहक के कंप्यूटर में गंभीर वायरस या सुरक्षा संबंधी समस्या है। जैसे ही ग्राहक उनके दिए गए "टेक सपोर्ट" नंबर पर कॉल करता था, ठगों का खेल शुरू हो जाता था। वे बड़ी चालाकी से ग्राहक को विश्वास दिलाते थे कि समस्या बहुत बड़ी है और उसे ठीक करने के लिए तुरंत भुगतान की आवश्यकता है।

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कॉल रिकॉर्डिंग ने खोले राज, डायरेक्टर्स पर गिरी गाज

छापेमारी के दौरान, ईडी को कई कॉल ट्रांसक्रिप्ट (कॉल रिकॉर्डिंग) मिलीं। इन रिकॉर्डिंग के विश्लेषण से चौंकाने वाले खुलासे हुए। यह स्पष्ट हो गया कि ये कॉल सेंटर पूरी तरह से टेक धोखाधड़ी में लिप्त थे। सबसे हैरानी की बात यह है कि कॉल सेंटरों के डायरेक्टर, जो मास्टरमाइंड थे, बिना किसी वैध लाइसेंस या संबंधित कंपनियों की अनुमति के स्पूफिंग गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। इसका मतलब है कि वे किसी और कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि ग्राहकों को यह लगे कि वे किसी असली टेक कंपनी से बात कर रहे हैं।

आमदनी का जरिया: क्रिप्टो और गिफ्ट कार्ड

इन ठगों की एक और चौंकाने वाली रणनीति थी। वे ग्राहकों से सीधे बैंक ट्रांसफर के बजाय, उन्हें क्रिप्टोकरेंसी या गिफ्ट कार्ड के माध्यम से भुगतान करने के लिए कहते थे। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि लेनदेन का पता लगाना मुश्किल हो जाए और वे कानून की पकड़ से बच सकें। यह एक ऐसा तरीका है जो दुनिया भर में साइबर अपराधियों द्वारा अपनी पहचान छुपाने के लिए अपनाया जाता है।

क्या है ईडी का अगला कदम?

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ईडी अब इन कॉल सेंटरों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही है। उनका लक्ष्य सिर्फ इन ठगों को पकड़ना नहीं है, बल्कि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकना है। अधिकारियों ने बताया है कि आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और संपत्ति कुर्क की जा सकती है। यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

आप कैसे बचें इस तरह की धोखाधड़ी से?

अज्ञात नंबरों से सावधान रहें: अगर आपको किसी कंपनी से अचानक कॉल आता है और वह आपकी तकनीकी समस्या का दावा करता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

सत्यापन करें: किसी भी सेवा के लिए भुगतान करने से पहले, कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा से संपर्क करके कॉल करने वाले की प्रामाणिकता की जांच करें।

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कभी भी संवेदनशील जानकारी साझा न करें: बैंक विवरण, पासवर्ड या क्रेडिट कार्ड नंबर जैसी जानकारी फोन पर किसी को न दें।

संदिग्ध पॉप-अप पर क्लिक न करें: ऐसे पॉप-अप अक्सर मैलवेयर होते हैं जो आपके सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कानूनी सलाह लें: यदि आप किसी धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत स्थानीय पुलिस और अपनी बैंक को सूचित करें।

इस तरह के अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ यह बताता है कि आज के डिजिटल युग में हमें कितनी सावधानी बरतने की जरूरत है। यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि ऑनलाइन दुनिया में सतर्कता ही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है। क्या आप अभी भी सोचते हैं कि यह आपके साथ नहीं हो सकता?

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