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एक बार फिर सुर्खियों में छाए पूर्व उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)
नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ एक बार फिर सुर्खियों में छाए हैं। इस बार वजह है उनका राजस्थान विधानसभा में पेंशन के लिए आवेदन। 1993 में किशनगढ़ से विधायक रहे धनखड़ को अब हर महीने 42,000 रुपये की पेंशन मिलेगी। लेकिन उनके इस आवेदन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब उन्होंने हाल ही में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका रहस्यमय इस्तीफा और अब यह पेंशन का आवेदन, क्या कोई बड़ा कनेक्शन है?
जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देना राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा झटका था। 21 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण "स्वास्थ्य" बताया था। लेकिन इस इस्तीफे के समय को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि उनका कार्यकाल अभी बाकी था। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है और सरकार से जवाब मांग रहा है।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में उनके अचानक "खामोश" हो जाने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, "राज्यसभा में जिनकी आवाज गूंजती थी, वो अचानक से चुप हो गए... पूरी तरह से चुप! ये बात सभी जानते हैं और पूछते हैं, भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति आखिर छिपे हुए क्यों हैं?"
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने ली थी चुटकी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा था कि उन्होंने 'लापता लेडीज' के बारे में तो सुना था, लेकिन 'लापता वाइस प्रेसिडेंट' का किस्सा पहली बार सुनने को मिला है। उन्होंने धनखड़ की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई थी। सिब्बल के अनुसार, उनके निजी सचिव ने केवल इतना बताया कि वे "आराम कर रहे हैं" और उसके बाद से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली।
विधानसभा स्पीकर ने की आवेदन की पुष्टि
धनखड़ के पेंशन आवेदन ने इस मामले को और भी दिलचस्प बना दिया है। राजस्थान विधानसभा के स्पीकर वासुदेव देवनानी ने पुष्टि की है कि उनका आवेदन प्राप्त हो गया है और उस पर काम चल रहा है। 1993 में कांग्रेस के विधायक के रूप में काम करने के कारण, उन्हें नियमानुसार मासिक पेंशन मिलेगी।
राजस्थान में नेताओं के लिए दोहरी-तिहरी पेंशन का प्रावधान है। यानी, अगर कोई व्यक्ति विधायक और सांसद दोनों रह चुका है, तो उसे दोनों पदों की पेंशन मिल सकती है। यही वजह है कि कई पूर्व नेता एक साथ अलग-अलग पदों से पेंशन लेते हैं। धनखड़ भी इसी श्रेणी में आते हैं।
पेंशन की राशि: उन्हें राजस्थान विधानसभा से लगभग 42,000 रुपये मासिक पेंशन मिलेगी।
नियमानुसार अधिकार: 1993 में किशनगढ़ से विधायक के तौर पर उनका यह कानूनी अधिकार है।
कब किया आवेदन: यह आवेदन उनके उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के कुछ समय बाद ही किया गया है।
सवाल यह है कि क्या यह सब सिर्फ एक संयोग है? एक तरफ, उनका अचानक इस्तीफा, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई, और दूसरी तरफ, इस्तीफा देने के तुरंत बाद पेंशन के लिए आवेदन करना। क्या कोई गुप्त संबंध है इन दोनों घटनाओं के बीच? या यह सिर्फ एक आम प्रक्रिया है जिसे बेवजह सुर्खियां मिल रही हैं?
जहां कुछ लोग इसे एक आम सरकारी प्रक्रिया मान रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे एक बड़े रहस्य के रूप में देख रहा है। जगदीप धनखड़ का अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो जाना, और अब उनका पेंशन के लिए आवेदन, यह सब एक ऐसे समय में हो रहा है जब देश की राजनीति में कई अनपेक्षित बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
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