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हिंद-प्रशांत में शांति या शक्ति प्रदर्शन? जानिए — India-Japan की नई रणनीति | यंग भारत न्यूज Photograph: (Young Bharat)
नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । नौसेना प्रमुख, एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने जापान दौरे पर दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इस दौरे से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने की भारत और जापान की प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है, जो वैश्विक मंच पर एक बड़ा संदेश है।
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी का जापान दौरा सिर्फ एक सामान्य शिष्टाचार भेंट नहीं था, बल्कि यह भारत-जापान नौसैनिक सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत है। टोक्यो में मेमोरियल सेनोटाफ पर श्रद्धांजलि अर्पित करने और गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करने के बाद, उन्होंने अपने जापानी समकक्ष, एडमिरल साइतो अकीरा के साथ महत्वपूर्ण बातचीत की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन जुड़ाव (operational engagements), इंटरऑपरेबिलिटी (interoperability), सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना रहा।
Adm Dinesh K Tripathi, CNS, during his ongoing official visit to Japan, paid tributes at the Memorial Cenotaph, reviewed the Guard of Honour and progressed discussions with Adm Saito Akira, Chief of Staff, JMSDF. Discussions focused on strengthening cooperation & synergy between… pic.twitter.com/fb3hJCeiSz
— ANI (@ANI) July 30, 2025
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बढ़ती साझेदारी: हिंद-प्रशांत में शांति की ओर एक कदम
एडमिरल त्रिपाठी और एडमिरल साइतो अकीरा के बीच हुई चर्चा इस बात पर केंद्रित थी कि कैसे दोनों नौसेनाएं मिलकर काम कर सकती हैं ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह क्षेत्र आज भू-राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है, और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक व्यापार और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। दोनों देशों ने संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाने पर जोर दिया। यह सब भारत-जापान नौसेना संबंध को और गहरा करने के उद्देश्य से है।
किन बिंदुओं पर हुई बात?
परिचालन जुड़ाव में वृद्धि: दोनों नौसेनाओं ने मिलकर अधिक समुद्री अभ्यास करने का संकल्प लिया, जिससे उनकी समन्वय क्षमता बढ़ेगी।
इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना: उपकरणों और प्रक्रियाओं में एकरूपता लाकर, दोनों बल आपातकालीन स्थितियों में और अधिक प्रभावी ढंग से एक साथ काम कर पाएंगे।
सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान: एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने से दोनों नौसेनाओं की दक्षता और तैयारी में सुधार होगा।
सहयोगी क्षमता निर्माण: संयुक्त प्रशिक्षण और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान से दोनों देशों की नौसेनाओं की क्षमताओं को मजबूत किया जाएगा।
प्रशिक्षण विनिमय पहल: अधिकारी और जवान एक-दूसरे के प्रशिक्षण संस्थानों में जाकर नए कौशल सीखेंगे।
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समुद्री सुरक्षा और भारत-जापान का साझा दृष्टिकोण
भारत और जापान दोनों ही नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास रखते हैं और हिंद-प्रशांत को मुक्त और खुला रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस दौरे ने इस साझा दृष्टिकोण को और मजबूत किया है। समुद्री डकैती (piracy), अवैध मछली पकड़ने (illegal fishing) और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए यह नौसैनिक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। एडमिरल त्रिपाठी का यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि क्वाड (Quad) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी सहयोग को बढ़ावा देगा। यह दिखाता है कि कैसे दो महत्वपूर्ण समुद्री शक्तियां एक साथ आकर क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा में योगदान दे सकती हैं।
आगे की राह: मजबूत होती दोस्ती, सुरक्षित समुद्र
यह दौरा भविष्य में भारत-जापान नौसेना के बीच कई और संयुक्त पहलों का मार्ग प्रशस्त करेगा। दोनों देशों की नौसेनाएं मिलकर चुनौतियों का सामना करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बढ़ती साझेदारी सिर्फ सैन्य सहयोग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास और दोस्ती का भी प्रतीक है।
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