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भारत ने की जापान से 21 बड़ी डील, 21वीं सदी का ब्लूप्रिंट तैयार

पीएम मोदी और जापान के शिगेरू इशिबा के बीच 21 बड़े समझौते भारत-जापान की दोस्ती को नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं। ये डील अमेरिका के लिए बड़ी चिंता का सबब बन गई हैं, क्योंकि ये दर्शाती हैं कि भारत अब अपनी स्वतंत्र नीति पर चल रहा है।

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Ajit Kumar Pandey
भारत ने की जापान से 21 बड़ी डील, 21वीं सदी का ब्लूप्रिंट तैयार | यंग भारत न्यूज

भारत ने की जापान से 21 बड़ी डील, 21वीं सदी का ब्लूप्रिंट तैयार | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)

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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । पीएम मोदी की जापान यात्रा ने एक नया इतिहास रच दिया है। भारत और जापान के बीच हुए 21 अहम समझौते सिर्फ एक साझेदारी नहीं, बल्कि 21वीं सदी के नए भारत की विकास गाथा का ब्लूप्रिंट हैं। ये डील अमेरिका को यह साफ संदेश देती हैं कि भारत अब अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे अमेरिका का वैश्विक दबदबा कम हो सकता है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ 21 बड़े समझौतों पर दस्तखत करके दुनिया को चौंका दिया। ये समझौते न सिर्फ भारत-जापान संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ते हैं, बल्कि अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती भी पेश करते हैं। अमेरिका से चल रहे टैरिफ वार के बीच हुई यह यात्रा एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगती है, जो बताती है कि भारत अब किसी एक धुरी पर नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर वैश्विक मंच पर खेल रहा है।

दशकों पुराना है भारत और जापान का रिश्ता

भारत और जापान दशकों से अमेरिका के करीबी सहयोगी रहे हैं, लेकिन अब दोनों देश एक 'अमेरिका-मुक्त' साझेदारी की राह पर चलते दिख रहे हैं। इसका सबसे बड़ा संकेत यह है कि ये समझौते सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामरिक, तकनीकी और यहां तक कि अंतरिक्ष क्षेत्र में भी एक नई दिशा दिखा रहे हैं। अमेरिका की चीन-विरोधी रणनीति में अब तक भारत और जापान का महत्वपूर्ण रोल रहा है, लेकिन अब यह साझेदारी बिना अमेरिकी दखल के आगे बढ़ रही है, जिससे ट्रंप प्रशासन की बेचैनी बढ़ना लाजमी है।

तकनीक, स्पेस, और सुरक्षा: वो 21 समझौते जिसने अमेरिका को हिला दिया है। इन 21 समझौतों की सूची देखें तो यह साफ हो जाता है कि भारत और जापान ने मिलकर एक मजबूत और आत्मनिर्भर भविष्य की नींव रखी है। इनमें से कुछ प्रमुख समझौते इस प्रकार हैं:

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सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा: यह समझौता साफ करता है कि भारत और जापान अब अपनी सुरक्षा को लेकर सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं हैं। यह चीन के बढ़ते दबदबे के खिलाफ एक स्वतंत्र मोर्चा खोलने जैसा है।

चंद्रयान-5 मिशन पर ISRO और JAXA की साझेदारी: यह डील NASA के लिए एक बड़ा झटका है। भारत ने अपने आगामी चंद्र मिशन के लिए अमेरिका के बजाय जापान को चुना, जो अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

डिजिटल साझेदारी 2.0 और AI पहल: अमेरिका को छोड़ कर जापान के साथ डिजिटल और AI साझेदारी करना तकनीकी क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता का प्रमाण है।

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खनिज संसाधन और सस्टेनेबल फ्यूल: ये समझौते न सिर्फ भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अमेरिका के प्रभुत्व को भी चुनौती देंगे।

जापान से 10 ट्रिलियन येन का निवेश: जापान ने अगले दशक में भारत में करीब 10 लाख करोड़ येन का निवेश करने का वादा किया है। यह एक बहुत बड़ा आंकड़ा है जो भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयां देगा और अमेरिका के निवेश को फीका कर देगा।

ये समझौते दर्शाते हैं कि भारत और जापान ने मिलकर एक ऐसी रणनीतिक स्थिति बना ली है जो अब अमेरिका की मर्जी से नहीं, बल्कि अपनी जरूरत के हिसाब से चलेगी।

क्या QUAD में कम हो जाएगा अमेरिका का दबदबा?

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भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया मिलकर 'क्वाड' समूह में चीन के खिलाफ काम करते हैं। लेकिन अब भारत-जापान के बीच हुई यह मजबूत साझेदारी क्वाड की गतिशीलता को बदल सकती है। यह संभव है कि अब भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया मिलकर अमेरिकी टैरिफ वार और उसके प्रभुत्व को चुनौती दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो अमेरिका की चीन को घेरने की रणनीति को बड़ा झटका लगेगा, और वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपना वर्चस्व खो सकता है।

यह यात्रा सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक नए विश्व व्यवस्था का संकेत है जहां देश अपनी नीतियों को स्वतंत्रता से निर्धारित कर रहे हैं। भारत ने जापान के साथ मिलकर एक ऐसी मिसाल पेश की है जो अन्य देशों को भी यह सोचने पर मजबूर करेगी कि क्या उन्हें भी सिर्फ अमेरिका पर निर्भर रहना चाहिए, या अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनानी चाहिए।

भारत और जापान की यह दोस्ती सिर्फ दो देशों के बीच की दोस्ती नहीं, बल्कि 21वीं सदी के भू-राजनीतिक समीकरणों को फिर से लिखने वाली एक ऐतिहासिक घटना है।

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