/young-bharat-news/media/media_files/2025/07/18/lalu-yadav-bihar-news-2025-07-18-11-57-24.jpg)
जमीन के बदले-रेलवे की नौकरी-CBI की चार्जशीट-सुप्रीम कोर्ट से झटका : अब लालू यादव के सामने क्या बचा है रास्ता? | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)
नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो और बिहार की राजनीति के कद्दावर नेता लालू प्रसाद यादव को नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब लालू यादव पहले से ही कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, और उनके राजनीतिक करियर के लिए यह एक और बड़ी बाधा बन सकता है।
आपको बता दें कि जमीन के बदले नौकरी मामला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए का है। आरोप है कि उन्होंने रेलवे में नौकरी देने के बदले लोगों से उनकी जमीनें कथित तौर पर अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम करवाईं। इस घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और बेटी मीसा भारती सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। सीबीआई का दावा है कि नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों ने अपनी जमीनें लालू यादव के परिवार के सदस्यों को "उपहार" या कम दामों पर बेचीं, जिसके बदले उन्हें रेलवे में नौकरी मिली।
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 29 मई के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के खिलाफ दिल्ली की एक विशेष अदालत में चल रहे मुकदमे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था। यह मुकदमा रेल मंत्री के रूप में उनके… pic.twitter.com/Cqqnc6R7ok
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 18, 2025
क्यों मांगी थी सुनवाई पर रोक?
लालू यादव और उनके परिवार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिका में दलील दी गई थी कि मामले की सुनवाई के लिए सीबीआई को अभी तक अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है, ऐसे में सुनवाई जारी रखना उचित नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया।
लालू परिवार पर क्या होगा असर?
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लालू परिवार के लिए एक बड़ा झटका है। तेजस्वी यादव, जो वर्तमान में बिहार में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिका निभा रहे हैं, और मीसा भारती, जो राज्यसभा सांसद हैं, पर भी इस मामले का सीधा असर पड़ सकता है। यह मामला न केवल उनके कानूनी भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि आगामी चुनावों में उनकी राजनीतिक साख को भी चुनौती दे सकता है। राजद, जो बिहार की राजनीति में एक प्रमुख शक्ति है, को इस झटके से उबरने के लिए नई रणनीति अपनानी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि अब सीबीआई को जल्द से जल्द अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करनी होगी, और मामला तेजी से आगे बढ़ेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि लालू यादव और उनकी कानूनी टीम अब इस स्थिति से कैसे निपटती है। उनके पास अब कुछ ही विकल्प बचे हैं, जिनमें जल्द से जल्द सुनवाई का सामना करना या आगे की कानूनी लड़ाई के लिए नए सिरे से रणनीति बनाना शामिल है।
राजनीतिक दबाव: विपक्षी दल इस मुद्दे को आगामी चुनावों में भुनाने की पूरी कोशिश करेंगे।
सार्वजनिक धारणा: यह घोटाला लालू यादव की छवि को और नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर युवाओं के बीच।
परिवार की भूमिका: परिवार के अन्य सदस्यों पर भी लगे आरोप उनके राजनीतिक करियर के लिए खतरा बन सकते हैं।
जिस तरह से यह मामला अब तक चला है, उससे यह साफ है कि यह कानूनी लड़ाई अभी लंबी चलेगी। सीबीआई अपनी पूरी ताकत से इस मामले को अंजाम तक पहुंचाना चाहेगी, जबकि लालू परिवार अपनी बेगुनाही साबित करने की हरसंभव कोशिश करेगा। देश की न्यायपालिका पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में न्याय कैसे होता है। यह मामला भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी बन सकता है।
supreme court | lalu yadav | indian railway