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"जम्मू-कश्मीर : ‘हमारी रियासत, हमारा हक’ की मांग पर कांग्रेस का मास्टरप्लान!"

जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस का 'हमारी रियासत हमारा हक' अभियान केंद्र सरकार पर दबाव बना रहा है। दिल्ली कूच के साथ INDIA गठबंधन का समर्थन भी मिल रहा है, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में गर्मा गया है।

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Ajit Kumar Pandey

"जम्मू-कश्मीर : ‘हमारी रियासत, हमारा हक’ की मांग पर कांग्रेस का मास्टरप्लान!" | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)

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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । जम्मू-कश्मीर की शांत वादियों में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से यहां के लोगों की उम्मीदें और आशंकाएं दोनों बढ़ी हैं। इसी बीच कांग्रेस ने 'हमारी रियासत हमारा हक' अभियान छेड़कर केंद्र सरकार को सीधे चुनौती दी है। आखिर क्या है इस आंदोलन का मकसद, और क्यों जम्मू-कश्मीर की जनता राज्य के दर्जे की बहाली चाहती है?

इस अभियान की अगुवाई कर रहे जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रमुख तारिक हमीद कर्रा ने साफ शब्दों में कहा, "पिछले 6 महीनों से, हम 'हमारी रियासत, हमारा हक' की मांग कर रहे हैं। हमने जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों में इस बारे में बात की है।" यह कोई रातोंरात लिया गया फैसला नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यापक जनसंपर्क का नतीजा है। पहले 'श्रीनगर चलो' और अब 'दिल्ली चलो' का आह्वान, कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है। कर्रा ने यह भी बताया कि INDIA गठबंधन के 233 सांसद उनके साथ हैं, और उनके गठबंधन के साथी भी उनका समर्थन करेंगे।

मोदी सरकार से वादे की याद: क्या हुआ राज्य के दर्जे का?

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कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने दिल्ली कूच के पीछे का खास मुद्दा उजागर किया। उन्होंने कहा, "आज हम एक खास मुद्दे को लेकर दिल्ली जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जम्मू-कश्मीर के कोने-कोने में 'हमारी रियासत हमारा हक' कार्यक्रम आयोजित किया।" मीर ने भाजपा के उस वादे की याद दिलाई जिसमें पुनर्गठन के बाद परिसीमन, फिर चुनाव और उसके बाद जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की बात कही गई थी।

मीर के अनुसार, "आज 10 महीने हो गए हैं लेकिन मोदी सरकार ने उस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।" यह आरोप सीधा और गंभीर है। जम्मू-कश्मीर के लोग एक स्थिर सरकार और पूर्ण राज्य का दर्जा चाहते हैं ताकि वे अपने फैसले खुद ले सकें और विकास की मुख्यधारा में लौट सकें।

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क्या था वादा? भाजपा ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद राज्य के दर्जे की बहाली का आश्वासन दिया था।

कितना इंतजार? कांग्रेस का कहना है कि 10 महीने बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जनता की आवाज: 'हमारी रियासत हमारा हक' अभियान दरअसल जम्मू-कश्मीर के लोगों की इसी मांग को मुखर कर रहा है।

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क्यों जरूरी है राज्य का दर्जा?

एक पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना जम्मू-कश्मीर के लिए कई मायनों में अहम है। इससे स्थानीय प्रशासन को मजबूती मिलती है और लोग अपने मुद्दों पर सीधी भागीदारी कर पाते हैं। केंद्र शासित प्रदेश होने से कई फैसलों के लिए केंद्र पर निर्भरता बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय स्वायत्तता प्रभावित होती है।

जम्मू-कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर पैदा करना बेहद जरूरी है। पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने से निवेशक अधिक सुरक्षित महसूस कर सकते हैं, जिससे निवेश और विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह स्थिति स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करेगी और बेरोजगारी की समस्या को कम करने में मदद करेगी।

स्वायत्तता की बहाली: राज्य का दर्जा मिलने से जम्मू-कश्मीर को अपनी विधायिका और कार्यकारी शक्तियां मिलेंगी, जिससे स्थानीय लोगों की जरूरतों के हिसाब से नीतियां बन सकेंगी।

विकास की रफ्तार: पूर्ण राज्य बनने से केंद्र सरकार पर निर्भरता कम होगी और राज्य अपने संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर पाएगा, जिससे विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।

जनप्रतिनिधित्व: विधानसभा चुनावों के बाद एक चुनी हुई सरकार लोगों के प्रति अधिक जवाबदेह होगी, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होगी।

आगे क्या? दिल्ली कूच और राजनीतिक दबाव

कांग्रेस का यह 'दिल्ली चलो' अभियान सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है। INDIA गठबंधन के सांसदों का समर्थन इसे और भी मजबूती देता है। यह दिखाता है कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का एक अहम हिस्सा बन गया है।

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