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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्कः राहुल गांधी के नजदीकियों में शुमार रणदीप सुरजेवाला ने बेंगलुरु में जब कहा कि कर्नाटक में सीएम बदलने की कोई प्लानिंग नहीं है तो साफ हो गया कि सिद्धारमैया ने सीएम की कुर्सी पर बैठे रहने का फार्मूला तलाश लिया है। वो आलाकमान को यह समझाने में कामयाब हो गए हैं कि उनके सीएम बने रहने के क्या फायदे हैं। उनकी बात सुनी गई तभी तो उनके धुर विरोधी डीके शिवकुमार ने खुद सामने आकर अपने समर्थकों से अपील की कि सीएम के पद पर उनकी दावेदारी को लेकर बयानबाजी न की जाए।
2023 में डीके के विरोध के बाद भी सीएम बन गए थे सिद्धारमैया
मौजूदा लमहे को देखकर कहा जा सकता है कि 2023 की तरह से सिद्धारमैया इस बार भी बाजी मार ले गए। 2023 में कर्नाटक विधानसभा के चुनाव परिणाम जब सामने आए और कांग्रेस को 135 सीटों पर जीत मिली तो डीके ने एड़ी चोटी का जोर मार दिया जिससे सीएम की कुर्सी पर काबिज हो जाएं। वो दिल्ली तक गए। लेकिन आखिर में बाजी सिद्धारमैया मार ले गए। डीके को डिप्टी सीएम के साथ कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी से संतोष करना पड़ा। हालांकि उस दौरान ये बात सामने आई थी कि कांग्रेस हाईकमान ने ढाई-ढाई साल का फार्मूला सुझाकर डीके को मनाया है। यानि पहले के ढाई साल सिद्धारमैया सीएम रहेंगे और बाकी के सालों में डीके शिवकुमार।
सिद्धारमैया के ढाई साल का समय सितंबर में पूरा हो रहा है। इसी वजह से डीके के समर्थक हल्ला मचाने लगे कि सीएम को बदला जाए। डीके ने जोर तो पूरा लगाया पर राहुल गांधी को वो ये समझाने में नाकाम रहे कि सीएम की कुर्सी उनको मिलने से क्या फायदा होगा। जब हल्ला ज्यादा हुआ तो राहुल ने सुरजेवाला को बेंगलुरु भेजा। उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए।
6 जनवरी 2026 तक सीएम बने रहे तो तोड़ देंगे उर्स का रिकार्ड
खैर, सिद्धारमैया की कुर्सी तो बच गई पर एक नया सवाल सामने आ गया कि वो कब तक सीएम रहेंगे। लेकिन अगर वो 6 जनवरी 2026 तक सीएम बने रहते हैं तो कर्नाटक में सबसे ज्यादासमय तक शासन करने वाले मुख्यमंत्री बन जाएंगे। अभी तक ये रिकार्ड डी देवराज उर्स के नाम पर है। वो भी कांग्रेस के नेता थे और दो कार्यकाल तक सीएम रहे। वो सात साल 238 दिनों तक सूबे के मुखिया बनकर रहे। एक कार्यकाल के दौरान वो लगातार 5 साल 285 दिनों तक सीएम रहे। 1973 में जब मैसूर का नाम बदलकर कर्नाटक किया गया तो उर्स सीएम बने। उर्स के सीएम बनने तक कर्नाटक (मैसूर) पर लिंगायत और वोक्कालिंगा ही राज करते रहे थे। उर्स पहले ऐसे सीएम थे जो पिछड़ी जाति से था। वो अरासू जाति से हैं। 2012 के आंकड़ों के हिसाब से इस जाति की कर्नाटक में कुल आबादी महज चालीस हजार ही है।
2013 में पहली बार सीएम बने थे सिद्धारमैया
सिद्धारमैया का बतौर सीएम ये दूसरा कार्यकाल है। पहली बार वो 2013 में सीएम बने थे। 2018 के चुनाव के बाद भी उन्होंने सीएम बनने की कोशिश की लेकिन तब कांग्रेस का गठजोड़ जेडीएस के साथ था। सीएम की कुर्सी पर एचडी कुमारस्वामी बैठ गए। सिद्धारमैया को मायूस होना पड़ गया। हालांकि उनकी सरकार बीच में ही धाराशाई हो गई। 2023 में चुनाव के बाद कांग्रेस को 135 सीटें मिलीं तो सिद्धारमैया सारे दांव आजमाकर सीएम की कुर्सी पर बैठ गए। trending | politics not present in content
Siddaramaiah, Karnataka's longest-serving CM, Karnataka CM, Devaraj Urs
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