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तेलंगाना : दलबदलुओं पर SC की सख्ती, स्पीकर को 3 महीने की मोहलत! | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)
नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । तेलंगाना में दलबदलुओं पर अब सुप्रीम कोर्ट की गाज गिरने वाली है। कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष को BRS विधायकों द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है। यह फैसला राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकता है, खासकर उन विधायकों के लिए जो कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
तेलंगाना विधानसभा में दलबदल का मुद्दा लंबे समय से गरमाया हुआ था। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कई विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे, जिसके बाद BRS ने इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर के समक्ष याचिकाएं दायर की थीं। हालांकि, इन याचिकाओं पर फैसला लंबित था, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज थीं। अब, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि स्पीकर को जल्द से जल्द, और किसी भी हालत में तीन महीने के भीतर, इन याचिकाओं पर निर्णय लेना होगा।
The Supreme Court has allowed the plea filed by BRS MLAs seeking directions to the Speaker of the Telangana Legislative Assembly to decide expeditiously over the disqualification petitions against the MLAs who had defected to the opposition party —Congress, in the State.
— ANI (@ANI) July 31, 2025
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दलबदल पर लगेगी लगाम? SC का सख्त संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने न केवल समय-सीमा तय की है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि कोई भी विधायक इस प्रक्रिया में देरी न कर सके। कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि कोई विधायक कार्यवाही को लंबा खींचने की कोशिश करता है, तो स्पीकर उसके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकते हैं। यह उन विधायकों के लिए एक सीधा संदेश है जो अपनी दलबदल को कानूनी दांव-पेच से बचाना चाहते थे। इस फैसले से लोकतंत्र की शुचिता और राजनीतिक जवाबदेही को बल मिलेगा।
तेलंगाना की राजनीति में क्या होगा असर?
इस फैसले का तेलंगाना की राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा। यदि ये विधायक अयोग्य घोषित होते हैं, तो संबंधित विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो सकते हैं। यह कांग्रेस और BRS दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा। BRS जहां अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश करेगी, वहीं कांग्रेस के लिए यह अपनी सत्ता बनाए रखने की चुनौती होगी। दलबदल विरोधी कानून, जिसका उद्देश्य विधायकों को राजनीतिक लाभ के लिए पाला बदलने से रोकना है, अब सख्ती से लागू होता दिख रहा है। यह फैसला भविष्य में दलबदल करने वाले विधायकों के लिए एक नजीर बन सकता है।
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