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जहां डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन मिलेंगे वहां क्यों जा रहे Indian Army के 400 जवान?

अलास्का में भारत-अमेरिका का 'युद्ध अभ्यास 2025' ट्रंप की चुनौतियों के बीच सैन्य दोस्ती का सबूत है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के सबक और अमेरिकी स्ट्राइकर वाहन का परीक्षण इस अभ्यास को खास बनाता है।

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Ajit Kumar Pandey
जहां डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन मिलेंगे वहां क्यों जा रहे Indian Army के 400 जवान? | यंग भारत न्यूज

जहां डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन मिलेंगे वहां क्यों जा रहे Indian Army के 400 जवान? | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)

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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क ।अलास्का के बर्फीले मैदानों में भारतीय और अमेरिकी सैनिक एक साथ उतरने वाले हैं। यह कोई आम सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि 'युद्ध अभ्यास 2025' का 21वां संस्करण है, जो भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है।

यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के बीच व्यापारिक शुल्क को लेकर तनाव बना हुआ है। इस बीच, इसी अलास्का में ही अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भी एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। क्या यह सिर्फ एक सैन्य अभ्यास है या इससे भी कहीं बढ़कर? आइए, इस पर गहराई से नजर डालते हैं।

दुनिया की दो बड़े लोकतांत्रिक और सैन्य ताकतें—भारत और अमेरिका—एक बार फिर साथ आ रही हैं। इस बार मैदान है अलास्का का बर्फीला, दुर्गम इलाका। 1 से 14 सितंबर तक चलने वाला 'युद्ध अभ्यास 2025', दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाएगा। मद्रास रेजिमेंट के नेतृत्व में भारत के 400 से ज्यादा जवान इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे। इसका मुख्य फोकस आतंकवाद रोधी अभियानों और आपदा राहत पर है। यह अभ्यास सिर्फ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक संदेश भी देता है कि व्यापारिक मतभेदों के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच सामरिक साझेदारी मजबूत है।

'युद्ध अभ्यास' का इतिहास और इस बार की खास बातें

'युद्ध अभ्यास' की शुरुआत 2004 में हुई थी। तब से यह हर साल बारी-बारी से भारत और अमेरिका में आयोजित किया जाता है। पिछले साल इसका 20वां संस्करण राजस्थान की तपती रेत में हुआ था, लेकिन इस बार का अभ्यास अलास्का की बर्फीली चोटियों पर होगा, जो जवानों को बिलकुल अलग तरह की चुनौती देगा।

इस बार के युद्ध अभ्यास 2025 में कई चीजें खास हैं:

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मद्रास रेजिमेंट का नेतृत्व: भारत की प्रतिष्ठित मद्रास रेजिमेंट की अगुआई में भारतीय सैनिक अलास्का पहुंचेंगे।

बड़ा दल: इस साल 400 से ज्यादा भारतीय सैनिक हिस्सा ले रहे हैं, जो पिछले सालों के मुकाबले कहीं ज्यादा है।

स्ट्राइकर गाड़ी का प्रदर्शन: अमेरिकी सेना अपनी नई एम्फीबियस (पानी में चलने वाली) स्ट्राइकर गाड़ी पेश करेगी। भारत इस पर अपनी नजर बनाए रखेगा, क्योंकि सफल परीक्षण के बाद भारत इसे खरीदने पर विचार कर सकता है।

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यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की तकनीक और कार्यशैली समझने का मौका देगा, खासकर ठंडे और पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन चलाने के लिए।

ऑपरेशन सिंदूर का सबक: अमेरिकी सेना की दिलचस्पी

इस साल के युद्ध अभ्यास 2025 में एक और अहम पहलू है 'ऑपरेशन सिंदूर'। यह भारत का एक हालिया सैन्य अभियान था, जिसमें भारत ने आतंकवादियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने अपनी रणनीति, ताकत और नई तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया था। अमेरिकी सेना अब इस ऑपरेशन से सीख लेना चाहती है।

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की आतंकवाद से निपटने की क्षमता को दिखाया है। इस अभ्यास में अमेरिका भारत की रणनीति को समझेगा, जैसे:

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  1. आतंकवादियों से निपटने के लिए संयुक्त योजना बनाना।
  2. वास्तविक हालात जैसे माहौल में अभ्यास करना।
  3. आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके मिशन को सफल बनाना।

यह दर्शाता है कि भारत की सैन्य क्षमता को अब अमेरिका भी गंभीरता से ले रहा है। दोनों सेनाएं मिलकर संयुक्त राष्ट्र के 'अध्याय VII' के नियमों के तहत आतंकवाद रोधी मिशन की तैयारी करेंगी।

व्यापारिक तनाव के बीच सैन्य दोस्ती

यह जानना दिलचस्प है कि जब एक ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ टैरिफ (शुल्क) को लेकर बहस में हैं, उसी दौरान भारत और अमेरिका की सेनाएं एक साथ सैन्य अभ्यास कर रही हैं। यह घटनाक्रम इस बात की पुष्टि करता है कि भले ही दोनों देशों के बीच आर्थिक मोर्चे पर तनाव हो, लेकिन सामरिक और सैन्य रिश्ते बहुत मजबूत हैं।

यह अभ्यास यह भी दर्शाता है कि रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच, अमेरिका के लिए भारत एक विश्वसनीय और महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। अलास्का में ट्रंप और पुतिन की मुलाकात के ठीक बाद, भारत-अमेरिका का यह अभ्यास एक तरह से दोनों देशों के संबंधों की मजबूती का प्रतीक है।

युद्ध अभ्यास 2025 केवल एक ट्रेनिंग इवेंट नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक मजबूत नींव है। यह दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के साथ काम करने, आधुनिक तकनीकों का आदान-प्रदान करने और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का मिलकर सामना करने का अवसर देता है। इस अभ्यास में होने वाली गतिविधियां—जैसे आतंकवाद रोधी ड्रिल, संयुक्त योजना और फील्ड ट्रेनिंग—दोनों देशों की सेनाओं को और भी ज्यादा समन्वित और कुशल बनाएंगी।

यह अभ्यास भारत के लिए भी एक बेहतरीन अवसर है। वह अमेरिकी सैन्य तकनीकों को करीब से देख सकता है, खासकर स्ट्राइकर गाड़ी जैसी तकनीक को, जो भविष्य में भारतीय सेना का हिस्सा बन सकती है। यह अभ्यास भारत-अमेरिका के रिश्तों को और भी गहरा और मजबूत बनाएगा, जिससे दोनों देशों की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित होगी।

इस तरह, युद्ध अभ्यास 2025 सिर्फ अलास्का में होने वाला एक सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक राजनीति, भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और भारत-अमेरिका के मजबूत होते रक्षा संबंधों का प्रतीक है।

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