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Demand : मौलाना मदनी को दी जाए तत्काल फांसी की सजा- यति नरसिंहानंद

शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर एवं श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के यति नरसिंहानंद गिरी ने जमायते उलमा-ए-हिंद के मौलाना मदनी द्वारा हाल के दिनों में दिए गए कथित “जिहाद”

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Syed Ali Mehndi
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यति ने जारी किया वीडियो

गाजियाबाद, वाईबीएन संवाददाता 

शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर एवं श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के यति नरसिंहानंद गिरी ने जमायते उलमा-ए-हिंद के मौलाना मदनी द्वारा हाल के दिनों में दिए गए कथित “जिहाद” से जुड़े बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यति नरसिंहानंद ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मौलाना मदनी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसा बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है और राज्य की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है।

जारी किया वीडियो 

इस वीडियो में उनके साथ उनके शिष्य यति अभयानंद, यति धर्मानंद, यति सत्यानंद और डॉ. योगेन्द्र योगी भी मौजूद दिखाई दे रहे हैं। वीडियो संदेश में यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा कि मौलाना मदनी का बयान अत्यंत आपत्तिजनक है और इससे समाज में तनाव फैल सकता है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रकार की भाषा देश की शांति-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है।यति नरसिंहानंद ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयानों से कट्टरता को बढ़ावा मिलता है और इससे देश का माहौल बिगड़ सकता है।

सीएम योगी से की मांग 

उन्होंने कहा कि यदि ऐसे बयानों पर तुरंत और सख्ती से कार्रवाई नहीं की गई तो आम जनता के बीच भय और असुरक्षा की भावना बढ़ेगी। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया कि सरकार ऐसे मामलों को गंभीरता से ले और कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाए।हालांकि, वीडियो में कही गई बातें व्यक्तिगत आरोप और दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश की विविधता और सामाजिक संरचना को देखते हुए धार्मिक नेताओं के बयान अत्यंत संवेदनशील होते हैं और ऐसे मुद्दों पर प्रतिक्रिया भी सोच-समझकर दी जानी चाहिए। प्रशासनिक और सुरक्षा एजेंसियाँ भी बार-बार अपील करती रही हैं कि किसी भी विवादित बयान या वीडियो को बिना सत्यापन के बढ़ावा न दिया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और सौहार्द बना रहे।

राजनीतिक बयान 

राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस प्रकार के विवादित बयानों पर चर्चा तेज हो जाती है। कई वर्गों का मानना है कि भड़काऊ भाषा किसी भी समस्या का समाधान नहीं होती, बल्कि समाज को और अधिक विभाजित कर सकती है। ऐसे में आवश्यकता होती है कि सभी पक्ष संयम, संवाद और संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात रखें।फिलहाल, यति नरसिंहानंद का यह बयान चर्चा में है और देखना होगा कि सरकार एवं संबंधित अधिकारी इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।

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