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Dipawali : तो क्या गाजियाबाद में दीपावली पर नहीं मिलेंगे पटाखे..

देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास का इलाका यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) हर साल दिवाली और अन्य पर्वों पर बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या से जूझता है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर तक पहुंच जाती है,

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Syed Ali Mehndi
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सांकेतिक फोटो

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गाजियाबाद, वाईबीएन संवाददाता ८

देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास का इलाका यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) हर साल दिवाली और अन्य पर्वों पर बढ़ते वायु प्रदूषण की समस्या से जूझता है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर तक पहुंच जाती है, जिसके पीछे औद्योगिक धुआं, पराली जलाना, वाहनों का उत्सर्जन और पटाखों का धुआं मुख्य कारण माना जाता है। इसी समस्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है।मेरठ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, शामली और मुजफ्फरनगर समेत आठ जिलों में पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है। यह फैसला वायु गुणवत्ता में सुधार लाने और लोगों को प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य खतरों से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।

फैसले का महत्व

एनसीआर क्षेत्र प्रदूषण की दृष्टि से देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां की घनी आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के कारण पहले से ही वायु गुणवत्ता गंभीर रहती है। पटाखे जलाने से प्रदूषण में अचानक कई गुना बढ़ोतरी हो जाती है। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस प्रतिबंध को लागू किया है।

उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर जेल भी भेजा जाएगा। इस कदम का उद्देश्य केवल नियम लागू करना ही नहीं बल्कि लोगों को इस गंभीर समस्या की गंभीरता से अवगत कराना भी है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर

पटाखों का धुआं वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे हानिकारक गैसों का स्तर बढ़ा देता है। इसके अलावा, PM2.5 और PM10 कण वायु में घुलकर सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों को बढ़ाते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक साबित होती है।इस रोक से उम्मीद है कि आने वाले समय में वायु प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी और लोगों को राहत मिलेगी।

वैकल्पिक उपाय

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सरकार और पर्यावरण विशेषज्ञ लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि त्योहारों को पारंपरिक तरीके से मनाएं और पटाखों की जगह दीप जलाएं। साथ ही, ‘ग्रीन क्रैकर्स’ जैसी अवधारणा को भी बढ़ावा दिया जा सकता है, जिनसे अपेक्षाकृत कम प्रदूषण होता है। हालांकि, फिलहाल आठ जिलों में इन पर भी प्रतिबंध लागू रहेगा।

 प्रदूषण गंभीर संकट 

एनसीआर के आठ जिलों में पटाखों पर यह रोक केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि लोगों की सेहत और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में लिया गया बड़ा कदम है। अब जिम्मेदारी जनता पर है कि वह इस फैसले का पालन करे और पर्यावरण को बचाने में अपना योगदान दे। यदि समाज सहयोग करता है, तो दिवाली की खुशियां रोशनी और उमंग के साथ-साथ स्वच्छ हवा में सांस लेने का सुख भी देंगी।

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