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Politics : सीएम योगी का दौरा और भाजपा पार्षद को ही कर दिया नजर बंद

आमतौर पर किसी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम या वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान विपक्षी नेताओं को नजरबंद किए जाने की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन गाजियाबाद में गुरुवार को ऐसा मामला देखने को मिला जिसने सभी को चौंका दिया। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन से

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Syed Ali Mehndi
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पार्षद ने साझा किया सोशल मीडिया पर फोटो

गाजियाबाद,वाईबीएन संवाददाता 

आमतौर पर किसी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम या वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान विपक्षी नेताओं को नजरबंद किए जाने की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन गाजियाबाद में गुरुवार को ऐसा मामला देखने को मिला जिसने सभी को चौंका दिया। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन से पहले जिला प्रशासन ने विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ताधारी पार्टी के अपने ही पार्षद को नजरबंद कर दिया।

गांधीनगर से पार्षद नीरज गोयल

गांधीनगर वार्ड से भाजपा पार्षद नीरज गोयल को सीएम योगी की गाजियाबाद में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत के दौरान घर से बाहर निकलने तक की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस सुबह ही उनके आवास पहुंच गई और सीएम के शहर से रवाना होने तक उन्हें नजरबंद रखा गया। इस कार्रवाई ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी, बल्कि प्रशासन के इस कदम पर कई तरह के सवाल भी उठने लगे हैं।

टैक्स वृद्धि का मामला

सूत्रों के अनुसार, नगर निगम द्वारा हाल ही में किए गए टैक्स बढ़ोतरी प्रस्ताव के विरोध में पार्षद नीरज गोयल ने खुलकर मोर्चा खोला था। उन्होंने निगम मुख्यालय पर धरना भी दिया था और कई अन्य पार्षद भी इसमें शामिल हुए थे। माना जा रहा है कि जिला प्रशासन को आशंका थी कि पार्षद सीएम योगी के समक्ष यह मुद्दा उठाने या किसी तरह से विरोध दर्ज कराने का प्रयास कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते उन्हें नजरबंद करने का निर्णय लिया गया।

अपनी ही पार्टी की सत्ता में पार्षद बेबस 

यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि यह पहली बार है जब सत्तारूढ़ दल का एक जनप्रतिनिधि अपने ही मुख्यमंत्री के आने पर प्रशासन की कार्रवाई का शिकार बना है। भाजपा नेता अक्सर “डबल इंजन सरकार” की सुचारु कार्यप्रणाली की तारीफ करते हैं, लेकिन इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब अपनी ही पार्टी के जनप्रतिनिधियों को आवाज उठाने पर रोका जाने लगे, तो लोकतंत्र में संवाद की गुंजाइश कहाँ बचती है?पार्षद नीरज गोयल ने इसे “जनता की आवाज को दबाने की कोशिश” बताया है। उनका कहना है कि टैक्स वृद्धि सीधे तौर पर आम नागरिकों पर बोझ बढ़ाती है और वे सिर्फ जनता की समस्याओं को उच्च स्तर तक पहुंचाने की भूमिका निभा रहे थे।यह घटना प्रशासनिक संवेदनशीलता, जनप्रतिनिधियों की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर नए सिरे से बहस छेड़ने के लिए पर्याप्त है।

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