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Politics : भाजपा में हलचल, मेयर का गोपनीय पत्र हुआ वायरल

नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव से पहले भाजपा संगठन में खलबली मच गई है। दरअसल, मेयर सुनीता दयाल का एक गोपनीय पत्र अचानक सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह पत्र प्रदेश अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष को संबोधित था, लेकिन इसके सार्वजनिक

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Syed Ali Mehndi
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फाइल फोटो

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गाजियाबाद, वाईबीएन संवाददाता

नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव से पहले भाजपा संगठन में खलबली मच गई है। दरअसल, मेयर सुनीता दयाल का एक गोपनीय पत्र अचानक सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह पत्र प्रदेश अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष को संबोधित था, लेकिन इसके सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

पार्षदों पर कार्रवाई की संस्कृति 

गौरतलब है कि गाजियाबाद नगर निगम में भाजपा का पूर्ण बहुमत है और निर्दलीय पार्षदों के शामिल होने से संख्या 70 से अधिक हो गई है। बावजूद इसके हाल ही में टैक्स वृद्धि के प्रस्ताव पर भाजपा पार्षदों ने खुलकर विरोध किया था। इसके अलावा पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन के गठन के दौरान भी पार्षदों ने निगम परिसर में दिन-रात डटे रहकर असहमति जताई थी।इन घटनाओं के बाद मेयर सुनीता दयाल ने संगठन को पत्र लिखकर पार्षद नीरज गोयल, गौरव सोलंकी, हिमांशु शर्मा और पूर्व पार्षद मनोज गोयल के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। लेकिन यह गोपनीय पत्र वायरल हो गया, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह दस्तावेज किसके इशारे पर सार्वजनिक किया गया।

भाजपा नेता हैरान, पत्र वायरल 

महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल ने कहा कि उन्हें यह पत्र मिला था, लेकिन इसे कैसे वायरल किया गया, इसकी जानकारी नहीं है। वहीं, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेन्द्र सिसोदिया ने भी माना कि पत्र उनके पास आया था और उन्होंने पार्षदों से बात की थी। हालांकि, उन्होंने भी पत्र वायरल होने की जानकारी से इनकार किया।मेयर सुनीता दयाल ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने संगठन के अनुशासन और कार्यप्रणाली को ध्यान में रखते हुए पत्र लिखा था। वायरल कैसे हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वे हल्के स्तर की राजनीति नहीं करतीं और संगठन के लिए हमेशा गंभीरता से काम करती हैं।

लेटर वार और अंदरूनी उठापटक 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निगम चुनाव से ठीक पहले इस तरह का विवाद भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। विपक्ष पहले ही भाजपा पर गुटबाजी का आरोप लगाता रहा है, और अब इस पत्र प्रकरण ने उनके आरोपों को और बल दे दिया है।हालांकि, संगठन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन इतना तय है कि चुनावी माहौल में इस ‘लेटर वार’ ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति को उजागर कर दिया है और इसका असर निगम कार्यकारिणी चुनाव पर भी पड़ सकता है।

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