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रेल मंत्री को लिखा पत्र
गाजियाबाद,वाईबीएन संवाददाता h
गाजियाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन पर जारी भवन निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्टेशन पर हर दिन हजारों यात्री आते-जाते हैं, लेकिन अधूरे और अव्यवस्थित निर्माण कार्य के चलते उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में यंग भारत न्यूज़ में कुछ दिन पहले विस्तृत खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद शहर विधायक संजीव शर्मा ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है।
रेल मंत्री को लिखा पत्र
विधायक संजीव शर्मा ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर स्टेशन पर जारी निर्माण कार्य को शीघ्र गति देने का आग्रह किया है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि लंबे समय से चल रहे इस निर्माण कार्य के कारण यात्रियों को न केवल असुविधा हो रही है, बल्कि स्टेशन की छवि भी धूमिल हो रही है। विधायक ने कहा कि गाजियाबाद जंक्शन NCR का प्रमुख रेलवे स्टेशन है, जहां से दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, कोलकाता सहित देश के विभिन्न हिस्सों के लिए ट्रेनें संचालित होती हैं। ऐसे में स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का अभाव किसी भी हाल में उचित नहीं है।
यात्रियों को असुविधा
विधायक ने पत्र में लिखा कि स्टेशन पर पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, शौचालयों की स्वच्छता और प्लेटफार्मों पर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रेलवे की जिम्मेदारी है। लेकिन धीमे निर्माण कार्य के कारण कई सुविधाएं बाधित हो रही हैं। उन्होंने रेल मंत्री से अपील की कि कार्य को तेजी से पूरा कराया जाए ताकि आमजन को राहत मिल सके।विधायक के मीडिया सलाहकार अजय चौपड़ा ने बताया कि संजीव शर्मा लगातार यात्रियों की समस्याओं पर नजर रखते हैं और उनका मानना है कि यात्रियों की परेशानियों को किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि रेल मंत्रालय जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा।
मलबे का ढेर
यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर निर्माण कार्य की वजह से जगह-जगह मलबा पड़ा रहता है और यातायात अव्यवस्थित हो गया है। कई बार यात्री प्लेटफार्म तक समय पर नहीं पहुंच पाते। वहीं, बारिश के मौसम में कीचड़ और पानी भरने से स्थिति और अधिक खराब हो जाती है।स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि रेलवे समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा कराए तो स्टेशन की सूरत बदल सकती है और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। अब सबकी निगाहें रेल मंत्रालय और अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे कब तक इस समस्या का स्थायी समाधान निकालते हैं।