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बैंकॉक, वाईबीएन न्यूज : थाईलैंड के संवैधानिक न्यायालय ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा को पद से हटा दिया। वह 2008 के बाद से पांचवीं पीएम बन गई हैं जिन्हें न्यायालय ने पद से हटाया।
शिनावात्रा की परेशानियां दरअसल फोन पर हुई एक बातचीत के लीक हो जाने से शुरू हुई। इस लीक फोन कॉल में वह पूर्व कंबोडियाई पीएम हुन सेन से बात कर रही थीं। यह बातचीत ऐसे समय में हुई थी जब दोनों देशों के बीच सीमा तनाव बढ़ रहा था।
कॉल में, पैटोंगटार्न ने हुन सेन को 'अंकल' कहकर संबोधित किया और एक थाई सैन्य कमांडर के बारे में अपमानजनक तरीके से बात की। यह बातचीत लीक होते ही देश में बवाल मच गया।
आलोचकों ने उन पर थाईलैंड की शक्तिशाली सेना को कमजोर करने और हुन सेन के प्रति अत्यधिक सम्मान दिखाने का आरोप लगाया। दर्जनों थाई सांसदों ने संवैधानिक न्यायालय में याचिका दायर कर उन्हें हटाने की मांग की। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि पैटोंगटार्न ने प्रधानमंत्री के लिए अपेक्षित नैतिक मानकों का उल्लंघन किया। संवैधानिक न्यायालय ने जुलाई में शिनावात्रा को पद से निलंबित कर दिया।
शिनावात्रा ने अपनी सफाई में कहा कि फोन कॉल पर उनकी चर्चा दरअसल 'बातचीत की तकनीक' थी। लेकिन अदालत ने कहा कि उन्होंने, 'जनता के विश्वास और भरोसे खो दिया है।'
फैसले के बाद शिनावात्रा ने अदालत के निर्णय को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उनका इरादा बढ़ते सीमा तनाव के बीच 'लोगों की जान बचाने' का था।
यह फैसला शिनावात्रा परिवार के लिए एक बड़ा झटका है, जिसने दो दशकों तक थाई राजनीति पर अपना दबदबा बनाए रखा है। पैतोंगटार्न थाईलैंड की सबसे युवा प्रधानमंत्री थीं. उन्होंने 37 साल की उम्र में 16 अगस्त, 2024 को प्रधानमंत्री पद संभाला था। वह देश की दूसरी महिला पीएम थीं।
संवैधानिक न्यायालय पर आलोचक सैन्य-समर्थक और राजतंत्र-समर्थक होने का आरोप लगाते रहे हैं। इसके फैसलों का देश की राजनीति पर गहरा प्रभाव देखा गया है।