Advertisment

अमेरिका-रूस तनाव 2025 : क्या परमाणु युद्ध के कगार पर है दुनिया?

क्या दुनिया परमाणु युद्ध के कगार पर है? रूस के सांसद की धमकी ने अमेरिका-रूस तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। जानें क्यों रूसी सांसद ने कहा कि अमेरिका की न्यूक्लियर पनडुब्बियां उनके निशाने पर हैं।

author-image
Ajit Kumar Pandey
अमेरिका-रूस तनाव 2025 : क्या परमाणु युद्ध के कगार पर है दुनिया? | यंग भारत न्यूज

अमेरिका-रूस तनाव 2025 : क्या परमाणु युद्ध के कगार पर है दुनिया? | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)

Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। हाल ही में रूसी सांसद विक्टर वोडोलात्स्की ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने भू-राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने अमेरिका की न्यूक्लियर पनडुब्बियों को रूस का सीधा निशाना बताया है। यह बयान दोनों महाशक्तियों के बीच बढ़ते टकराव को एक नए और खतरनाक स्तर पर ले जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दुनिया एक और शीत युद्ध की ओर बढ़ रही है और इन दोनों देशों के बीच तनाव की असल वजह क्या है? आइए, इस मुद्दे की तह तक जाते हैं।

रूस के एक वरिष्ठ सांसद विक्टर वोडोलात्स्की के बयान ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। वोडोलात्स्की ने खुलकर कहा है कि अमेरिका की न्यूक्लियर पनडुब्बियां रूस के निशाने पर हैं। यह बयान यूक्रेन युद्ध के बाद से लगातार बिगड़ रहे अमेरिका-रूस संबंधों का एक और भयावह अध्याय है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सिर्फ एक धमकी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है, जो दर्शाती है कि दोनों देश एक-दूसरे के प्रति कितनी आक्रामक नीति अपना रहे हैं।

तनाव की जड़: यूक्रेन से लेकर नाटो तक

अमेरिका-रूस के बीच इस तनाव की जड़ें यूक्रेन युद्ध में गहरी हैं। रूस ने जब यूक्रेन पर हमला किया, तो अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों ने कड़े प्रतिबंध लगाकर रूस को सबक सिखाने की कोशिश की। अमेरिका ने यूक्रेन को भारी मात्रा में सैन्य और आर्थिक सहायता दी, जिससे रूस काफी भड़का हुआ है। रूस का आरोप है कि अमेरिका अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रहा है और नाटो को पूर्वी यूरोप में फैलाकर उसकी सुरक्षा को खतरा पहुँचा रहा है।

क्यों है न्यूक्लियर पनडुब्बियां निशाने पर?

विक्टर वोडोलात्स्की के बयान के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। रूस को लगता है कि अमेरिका अपनी न्यूक्लियर पनडुब्बियों का इस्तेमाल काला सागर और बाल्टिक सागर जैसे संवेदनशील जलक्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए कर रहा है। ये पनडुब्बियां न केवल पारंपरिक हमले कर सकती हैं, बल्कि ये परमाणु मिसाइलों से भी लैस होती हैं, जिससे रूस की सुरक्षा को सीधा खतरा महसूस होता है।

Advertisment

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति एक नए शीत युद्ध जैसी है। अमेरिका और रूस के बीच सीधा सैन्य टकराव तो नहीं हो रहा, लेकिन दोनों देश एक-दूसरे पर परोक्ष रूप से हमला कर रहे हैं। साइबर हमले, आर्थिक प्रतिबंध और अब इस तरह के बयान इस बात का सबूत हैं कि दोनों के बीच की खाई लगातार गहरी होती जा रही है। ऐसे में, यह जरूरी हो जाता है कि दोनों देश बातचीत का रास्ता अपनाएं, ताकि दुनिया को एक बड़े संकट से बचाया जा सके।

यह अमेरिका-रूस तनाव सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। अगर यह तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो दुनिया की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा और बढ़ जाएगा।

US-Russia tension 2025 | Russian MP | Nuclear Submarines

Nuclear Submarines Russian MP US-Russia tension 2025
Advertisment
Advertisment