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अजय यादव, सामाजिक कार्यकर्ता
मोदी जी, हम किसानों पर भरोसा कीजिये, अमेरिका के आगे न झुकने पर आपको जो भी कीमत चुकानी पड़ेगी, उसके एक-एक अंश की भरपाई खून-पसीने के रूप में करने के लिए किसान और जवान तैयार हैं। अनेक बार यह सिद्ध हो चुका है कि जब-जब भी देश-दुनिया में संकट आये हैं, तब-तब किसानों ने ही देश का सम्भाला है, उबारा है।
भारत के किसान तैयार हैं
अभी तक व्यक्तिगत रूप से मेरी चिंता यह थी कि अधिकृत रूप से न तो कोई नेता, न कोई नौकरशाह इतनी स्पष्टता और दमदारी से यह कह रहे थे कि हम किसानों के मुद्दे पर अमेरिका के आगे नहीं झुकेंगे। इसीलिये मेरे गॉंव फ़ौलादपुर में 9 दिनों तक किसानों ने धरना दिया, जिसका उद्देश्य सरकार तक यही संदेश देना था कि वह अमेरिका के आगे न झुके, भारत के किसान हर नुकसान की कीमत और भरपाई के लिए तैयार हैं।
यदि प्रार्थना में शुभ की कामना है ...
मीडिया या डिजिटल माध्यमों से आप तक सन्देश पहुंचा या नहीं पहुंचा, मुझे नहीं पता। लेकिन, यह मुझे पता है कि यदि प्रार्थना में शुभ की कामना है, तो नियति और प्रकृति का जर्रा-जर्रा उसके लिए लग जाता है, और सुदूर बैठे मिस्टर मोदी के मन मस्तिष्क तक प्रेरणा कर देता है, तो उससे भी सुदूर बैठे ट्रम्प जैसे जोकरों की बुद्धि को भ्रष्ट भी कर देता है।
अवसर है, अपने दम पर दुनिया के सामने खड़े होने का
मिस्टर मोदी, आप ही के शब्दों में कहूँ तो मुझे यह भी लगता है कि यह आपदा भी, हमारे लिए अवसर है। अवसर है, अपने दम पर पूरी जोरदारी से दुनिया के सामने खड़े होने का। जैसे, कोरोना काल के बाद बहुत सारी वे चीजें भारत के उद्यमियों ने बनानी शुरू कर दीं, जिनकी चीन पर निर्भरता थी, कई नए स्टार्टअप्स खड़े हुए। नीति आयोग के पूर्व पदाधिकारी अमिताभ कांन्त भी ऐसी ही सम्भावनाएं जता रहे हैं कि यह भारत के खड़े होने के लिए सही समय है।
... देशवासियों पर भरोसा कीजिये
अतः मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, एक बार फिर समय कह रहा है कि, अपने किसानों, देशवासियों पर भरोसा कीजिये। यकीं कीजिये, इसके बाद शर्तें और कीमतें हम तय करेंगे, और हम ही तय करेंगे।
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