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PALAMU:-अनुसूचित जाति राज्य आयोग व अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद को पुनर्जीवित करें ,

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र , YBN पलामू :झारखंड राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य में अनुसूचित जाति राज्य

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Md Zeeshan Samar
झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर

झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर

आयोग तथा अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद को पुनर्जीवित करते हुए शीघ्र अधिसूचना जारी करने की मांग की है। पत्र में उन्होंने कहा है कि झारखण्ड राज्य गठन के लगभग 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। झारखंड में अनुसूचित जाति की संख्या लगभग 50 लाख है। यहां पर हरिजन जाति के लोग सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण से काफी पिछड़े हुए हैं। अधिकांश लोग भूमिहीन हैं और मजदूरी कर अपनी जीविका चलाते हैं। सफाई कर्मचारी, चर्मकार, भुईयां, मुसहर जाति की स्थिति तो राज्य के आदिम जनजाति से भी बदतर है। घोर गरीबी के कारण महिलाएं व बच्चे खून की कमी और कुपोषण से ग्रसित हैं। उनके आर्थिक उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाएं मुर्गी, बकरी एवं सूकर पालन तक ही सीमित है। उन्होंने यह भी कहा है कि झारखंड कल्याण विभाग की अधिसूचना संख्या- 1969, दिनांक- 15/09/2008 को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित 17 सदस्यों की समिति भी गठित कर दी गई थी। 2008 में ही परामर्शदात्री परिषद की नियमावली भी बना दी गई थी। झारखंड के हरिजन जाति के लोगों में काफी हर्ष और उल्लास था। बावजूद उनकी खुशी में ग्रहण तब लग गया जब परामर्शदात्री परिषद आज तक अपने नियमित स्वरूप में नहीं आ सका। राज्य के हरिजन जाति के लोगों को इंडिया गठबंधन की सरकार से बहुत उम्मीदें बंधी है।

ठगा-ठगा सा महसूस कर रहे हरिजन जाति के लोग।
पत्र में उन्होंने कहा है कि 2019 के विधान सभा चुनाव में हरिजन जाति के वोट प्राप्त करने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में भाजपा शासन काल में अनुसूचित जाति आयोग का गठन किया गया था। आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति भी कर दी गई थी परन्तु आयोग में किसी भी पदाधिकारी के पदस्थापना नहीं होने के कारण अनुसूचित जाति आयोग कभी भी क्रियाशील नहीं है। वर्तमान में अनुसूचित जाति राज्य आयोग तो अस्तित्व में ही नहीं है। इसी तरह झारखंड के हरिजन जाति के संरक्षण एवं सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए नीति तैयार करने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद का गठन किया था। नियमावली भी बना दी गयी थी। 17 वर्षों से अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद कल्याण विभाग भी संचिकाओं में ही दर्ज होकर रह गई है। यह झारखंड के अनुसूचित जाति के साथ क्रूर मजाक की तरह है

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