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बिहार की सियासत इन दिनों सिर्फ़ "वोटर अधिकार यात्रा" तक सीमित नहीं है। इस यात्रा के परदे के पीछे कांग्रेस हाईकमान की एक खुफिया टीम चुपचाप मैदान में सक्रिय है। राहुल गांधी की यह निजी टीम बिहार कांग्रेस की जमीनी ताक़त, नेताओं की सक्रियता और महागठबंधन के भीतर तालमेल का बारीकी से आकलन कर रही है। जानकारी के अनुसार, यात्रा खत्म होते ही इस पूरी रेकी का प्रेजेंटेशन तैयार होगा और उसी के आधार पर आने वाली राजनीतिक रणनीति तय की जाएगी।
सीक्रेट टीम कर रही कार्यकर्ताओं से संवाद
कांग्रेस की इस "सीक्रेट टीम" ने यात्रा के दौरान न सिर्फ कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया, बल्कि महागठबंधन के घटक दलों के नेताओं से भी मुलाकात की। टीम का मुख्य काम यह समझना है कि कौन नेता संगठन में वाकई प्रभावी है और किसकी मौजूदगी सिर्फ़ नाम भर की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस जांच में कांग्रेस के भीतर खींचतान, निष्क्रिय पदाधिकारी और मौके पर चेहरा दिखाकर गायब हो जाने वाले नेताओं की लिस्ट भी बन चुकी है।
इस टीम की खासियत यह है कि यह बिना पहचान उजागर किए काम कर रही है। बस को ही अस्थायी दफ़्तर में बदल दिया गया है जहां से हर बातचीत और आंकड़ा तुरंत दिल्ली तक पहुंचाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि टीम में छत्तीसगढ़, झारखंड और कर्नाटक के रणनीतिकार शामिल हैं जबकि बिहार से गिने-चुने लोग ही इस मिशन का हिस्सा हैं।
यात्रा के दौरान कई जिलों में तैनात ऑब्जर्वर भी अपनी रिपोर्टिंग इसी प्रक्रिया के तहत भेज रहे हैं। मतलब साफ है कि राहुल गांधी बिहार कांग्रेस को लेकर किसी बड़े बदलाव की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अंतिम चरण में तैयार होने वाला पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन न केवल बिहार कांग्रेस की हकीकत उजागर करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि आगे का नेतृत्व किसके हाथों में होगा।
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