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बिहार के सीमावर्ती जिलों में नागरिकता को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है. चुनाव आयोग के निर्देश पर चल रहे सिस्टमैटिक इंटरवेंशन एंड रिफॉर्म (SIR) कार्यक्रम के तहत 3 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस भेजा गया है। यह नोटिस उन लोगों को मिला है जिनकी नागरिकता पर सवाल उठाए गए हैं। इस अभियान का सबसे बड़ा असर नेपाल और बांग्लादेश से सटे आठ जिलों में दिखाई दे रहा है, जहां लंबे समय से फर्जी मतदाता और नागरिकता को लेकर विवाद चलता रहा है।
सीमावर्ती जिलों में अधिक नोटिस
जिन जिलों में नोटिस भेजा गया है उनमें किशनगंज, पूर्णिया, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, अररिया, सहरसा, मधुबनी और सुपौल शामिल हैं। इन जिलों की भौगोलिक स्थिति और सीमावर्ती इलाकों में आवाजाही की खुली व्यवस्था को देखते हुए यहां कई बार बाहरी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने की शिकायतें सामने आई हैं। इसी वजह से अब चुनाव आयोग ने बड़े पैमाने पर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है।
जिन्हें नोटिस भेजे गए, उन्हें नागरिकता साबित करनी होगी
नोटिस पाने वाले लोगों को अब अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसमें जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड या अन्य सरकारी पहचान पत्र शामिल हैं। अगर निर्धारित समय सीमा में सही दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए तो ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध करने के लिए आवश्यक है।
हालांकि इस कार्रवाई से प्रभावित लोग और कुछ सामाजिक संगठन इसे लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि गरीब और अशिक्षित तबके को इस प्रक्रिया में दिक्कत हो सकती है क्योंकि कई बार उनके पास दस्तावेज सुरक्षित नहीं रहते। वहीं राजनीतिक दल भी इस अभियान को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ दल इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती बता रहे हैं, जबकि अन्य का आरोप है कि इससे आम लोगों को अनावश्यक परेशान किया जा रहा है।
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