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लैंड फॉर जॉब घोटाला: तेजस्वी-तेजप्रताप के नाम जमीन कैसे लिखी गई? CBI ने किए चौंकाने वाले खुलासे

CBI ने लैंड फॉर जॉब घोटाले में खोली पोल! तेजस्वी-तेजप्रताप के नाम जमीन कैसे लिखवाई गई? मार्केट रेट से 6 गुना कम दाम, कैश ट्रांजैक्शन का खेल। पूरा मामला जानें।

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YBN Bihar Desk
Lalu Family Scam
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पटना , वाईबीएन डेस्क ।बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Yadav) पर एक बार फिर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। CBI की ताजा चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि लालू के दोनों बेटों—तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और तेजप्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) के नाम जमीनें मार्केट वैल्यू से 6 गुना कम दाम पर लिखवाई गईं। यह सब हुआ था रेलवे में नौकरी दिलाने के एवज में।

CBI ने "लैंड फॉर जॉब" घोटाले में दायर अपनी चार्जशीट में बताया है कि 2005 में एक व्यक्ति ने अपने बेटे को रेलवे में नौकरी दिलाने के लिए दो जमीनें तेजस्वी और तेजप्रताप के नाम गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर कर दीं। हैरान करने वाली बात यह है कि उस समय दोनों भाई नाबालिग थे, और जमीनों का ट्रांजैक्शन उनकी मां व पूर्व सीएम राबड़ी देवी की देखरेख में हुआ।

मार्केट रेट से 6 गुना सस्ती जमीन!

CBI के मुताबिक, जमीनों का सर्कल रेट 5,700 रुपये था, जबकि उस समय मार्केट वैल्यू करीब 34,200 रुपये (6 गुना ज्यादा) थी। यानी, लालू परिवार ने जमीनें बेहद कम दाम पर हासिल कीं। चार्जशीट में दावा किया गया है कि ऐसे कई केस हैं, जहां लोगों ने रेलवे में नौकरी पाने के लिए अपनी जमीनें लालू परिवार को सस्ते में ट्रांसफर कीं।

CBI ने आरोप लगाया है कि नकद लेनदेन का कोई सबूत नहीं मिला है। जमीन देने वाले लोगों ने दावा किया कि उन्हें कैश में पैसे मिले, लेकिन इसका कोई बैंक रिकॉर्ड नहीं है। यह पूरा घोटाला 2004 से 2009 के बीच हुआ, जब लालू यादव रेल मंत्री थे।

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इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव के अलावा उनकी बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव भी आरोपी हैं। CBI ने IPC की धारा 120B (षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी) और PC Act के तहत केस दर्ज किया है।

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