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Bombay High Court का बड़ा फैसला: कबूतरों को दाना डालना है सार्वजनिक उपद्रव, FIR के निर्देश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कबूतरों को दाना डालने को सार्वजनिक उपद्रव और स्वास्थ्य के लिए खतरा बताया। BMC को उल्लंघन करने वालों पर FIR दर्ज करने का आदेश। जानें पूरी जानकारी।

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Dhiraj Dhillon
Petition claiming 75 lakh votes were cast after 6 PM dismissed
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि कबूतरों को सार्वजनिक स्थानों पर दाना डालना न केवल सार्वजनिक उपद्रव है, बल्कि इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा होता है। अदालत ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को ऐसे लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने और सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा- "यह जनस्वास्थ्य का मुद्दा है"

न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी और आरिफ डॉक्टर की पीठ पशु प्रेमियों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ कबूतरों को दाना डालने की बात नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा मसला सार्वजनिक स्वास्थ्य और संक्रमण के खतरे से जुड़ा है, जिससे सभी आयु वर्ग के लोगों पर असर पड़ता है।

बीएमसी को कबूतरखाने नहीं तोड़ने का आदेश

अदालत ने हाल ही में बीएमसी को निर्देश दिया था कि वह पुराने विरासती कबूतरखानों को ध्वस्त न करे, लेकिन साथ ही यह भी कहा था कि वहां कबूतरों को दाना डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि लोग अभी भी इन स्थानों पर दाना डाल रहे हैं, जो कि आदेश की अवहेलना है।

कोर्ट ने FIR और दंडात्मक कार्रवाई का आदेश दिया

अदालत ने कहा-जो भी व्यक्ति या समूह BMC के आदेशों की अवहेलना करते हुए कबूतरों को दाना डालते हैं, उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई और मुकदमा चलाया जाए, क्योंकि ऐसे कृत्य बीमारियों के प्रसार और सार्वजनिक जीवन के लिए खतरा बन सकते हैं।

बीएमसी उठाए सख्त कदम

कोर्ट ने BMC को निर्देश दिया कि वह मुंबई के विभिन्न कबूतरखानों में कबूतरों की भीड़ रोकने के लिए सभी जरूरी और कड़े कदम उठाए। अदालत ने साफ किया कि मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा अब सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

“बीएमसी ने बिना नोटिस कबूतरखाने तोड़े”

इस याचिका को पल्लवी पाटिल, स्नेहा विसारिया और सविता महाजन ने दायर किया था। उनका आरोप था कि बीएमसी ने बिना किसी वैध आधार के 3 जुलाई से कबूतरखानों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने इसे पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का उल्लंघन बताया।  bombay high court | Bombay High Court verdict
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