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Delhi Breaking : साकेत कोर्ट में वकीलों का हंगामा, जानें पुलिस से क्यों भिड़े वकील?

साकेत कोर्ट में पुलिस द्वारा वकीलों पर FIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, वकीलों का आरोप- झूठी FIR दर्ज हुई, पुलिस ने वकील पर हमला किया। न्याय व्यवस्था पर सवाल, गतिरोध जारी।

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Ajit Kumar Pandey
Delhi Breaking : साकेत कोर्ट में वकीलों का हंगामा, जानें पुलिस से क्यों भिड़े वकील? | यंग भारत न्यूज

Delhi Breaking : साकेत कोर्ट में वकीलों का हंगामा, जानें पुलिस से क्यों भिड़े वकील? | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)

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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । साकेत कोर्ट परिसर में पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) पर कथित हमले को लेकर दिल्ली पुलिस द्वारा प्राथमिकी (FIR) दर्ज किए जाने के विरोध में वकीलों ने प्रदर्शन किया। वकीलों का आरोप है कि पुलिस ने उनके खिलाफ झूठी FIR दर्ज की है। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस और वकीलों के बीच पुराने तनाव को सतह पर ला दिया है। आखिर क्या है पूरा मामला, जो दिल्ली की अदालतों में हंगामा खड़ा कर रहा है?

दिल्ली की साकेत कोर्ट एक बार फिर चर्चा में है। इस बार कारण कोई बड़ा आपराधिक मामला नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच का टकराव है। बीते दिनों साकेत कोर्ट परिसर में एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर पर कथित हमले के बाद दिल्ली पुलिस ने वकीलों के खिलाफ FIR दर्ज की। इसी के विरोध में वकीलों ने जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कोर्ट परिसर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा स्थिति का जायजा ले रहे हैं। आखिर क्यों वकीलों को सड़कों पर उतरना पड़ा और क्या है इस पूरे विवाद की जड़?

वकीलों का गुस्सा: "झूठी FIR, अन्याय का विरोध!"

साकेत कोर्ट के सचिव अनिल बसोया ने इस विरोध प्रदर्शन पर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ किया, "हम हड़ताल नहीं चाहते, लेकिन हमें यह करना पड़ रहा है क्योंकि हमें अन्याय का सामना करना पड़ रहा है।" बसोया के अनुसार, पुलिस ने वकीलों के खिलाफ एक झूठी FIR दर्ज की है, जिसके विरोध में वे प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोग एक वकील के आवास के पास अवैध गतिविधियां कर रहे थे। जब वह वकील इसकी शिकायत दर्ज कराने नजदीकी पुलिस स्टेशन गया, तो सब-इंस्पेक्टर ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया और उलटा वकील पर हमला कर दिया।

क्या यह घटना एक संयोग थी, या पुलिस और वकीलों के बीच वर्षों से चली आ रही खींचतान का नतीजा? बसोया ने आगे बताया कि जब उसी सब-इंस्पेक्टर से कोर्ट में मुलाकात हुई, तो उसने फिर से वकील पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन अन्य वकीलों ने उसे बचाया। इसी घटना के बाद पुलिस ने वकीलों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी। यह आरोप बेहद गंभीर हैं और दर्शाते हैं कि विवाद की जड़ सिर्फ एक FIR नहीं, बल्कि पुलिस के रवैये को लेकर वकीलों में पनपा असंतोष है।

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पुलिस पर गंभीर आरोप: "हमारी शिकायतें अनसुनी क्यों?"

वकीलों का यह भी कहना है कि पुलिस वकीलों की शिकायतों पर कभी कोई जांच नहीं करती। यह एक ऐसा आरोप है जो न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को हिला सकता है। अगर न्याय दिलाने वाले ही शिकायत करें और उनकी सुनवाई न हो, तो आम आदमी क्या उम्मीद करेगा? बसोया ने स्पष्ट किया, "अगर वे हमारी मांग पूरी करते हैं, तो हम हड़ताल बंद कर देंगे; अन्यथा, यह जारी रहेगा।" उनकी मांगों में झूठी FIR को रद्द करना और पुलिस द्वारा वकीलों के प्रति उचित व्यवहार सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पुलिसकर्मियों को कोर्ट परिसर में प्रवेश करने या वहां काम करने की अनुमति नहीं देंगे।

क्या यह गतिरोध जल्द खत्म होगा? या यह आने वाले दिनों में और गहराएगा? यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली पुलिस इस मामले पर क्या रुख अपनाती है। इस बीच, आम जनता और मुवक्किलों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि अदालती कार्यवाही प्रभावित हो रही है।

दिल्ली पुलिस का क्या है कहना?

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इस पूरे प्रकरण पर दिल्ली पुलिस ने अभी तक विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, कोर्ट परिसर के बाहर पुलिस की भारी तैनाती और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी से साफ है कि पुलिस भी स्थिति की गंभीरता को समझ रही है। उनका मुख्य उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई अप्रिय घटना न हो। लेकिन, इस विवाद का मूल कारण सुलझाए बिना, केवल बल प्रयोग से समस्या का स्थायी समाधान मुश्किल है।

यह कोई पहली बार नहीं है जब दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच टकराव हुआ हो। अतीत में भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिन्होंने न्याय प्रणाली के इन दो महत्वपूर्ण स्तंभों के बीच के संबंधों में खटास पैदा की है।

आखिर क्यों बार-बार होता है यह टकराव?

अधिकार क्षेत्र का विवाद: कई बार पुलिस और वकील अपने-अपने अधिकारों को लेकर आमने-सामने आ जाते हैं।

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समझ की कमी: दोनों पक्षों के बीच एक-दूसरे के कामकाज और चुनौतियों को समझने की कमी भी विवादों को जन्म देती है।

अहं का टकराव: कुछ मामलों में व्यक्तिगत अहं का टकराव भी बड़े विवाद का रूप ले लेता है।

शिकायत निवारण तंत्र की कमी: वकीलों का आरोप है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता, जिससे उनमें असंतोष पनपता है।

यह विवाद सिर्फ साकेत कोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे दिल्ली की न्यायिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि यह गतिरोध लंबा खिंचता है, तो लंबित मामलों की संख्या और बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर न्याय की गति पर पड़ेगा।

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