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चंबा-मंडी से मनाली तक कहर : रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, 7 की मौत, 9 लापता, मोबाइल नेटवर्क ठप | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)
नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क ।हिमाचल प्रदेश में पिछले कई दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने इस "देवभूमि" को एक भयावह मंजर में बदल दिया है। शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को चंबा, मंडी और मनाली के बीच कुदरत का ऐसा कहर टूटा है कि हजारों जिंदगियां खतरे में हैं। फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने कई सड़कों, पुलों और घरों को बहा दिया है, जिससे इन इलाकों का संपर्क बाकी दुनिया से कट गया है। हर तरफ तबाही के निशान हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
हिमाचल प्रदेश की हर घाटी में इस वक्त तबाही का खौफनाक मंजर देखने को मिल रहा है। चंबा में जहां मणिमहेश यात्रा पर गए हजारों श्रद्धालु फंसे हुए हैं, वहीं मंडी और कुल्लू में ब्यास नदी का रौद्र रूप सब कुछ अपने साथ बहा ले जाने को आमादा है। चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे कई जगहों पर धंस गया है, जिसने रेस्क्यू ऑपरेशन को और भी मुश्किल बना दिया है।
चंबा: मणिमहेश यात्रा पर गए 3280 श्रद्धालुओं का रेस्क्यू
चंबा जिले में मणिमहेश यात्रा पर गए करीब 3280 लोग अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण फंस गए थे। इन यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। हालांकि, मोबाइल नेटवर्क और सड़कों के पूरी तरह बंद होने से स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी।
भारतीय सेना और एनडीआरएफ की टीमों ने हेलीकॉप्टर और रस्सी की मदद से बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। कई श्रद्धालुओं को तो 80 किलोमीटर तक पैदल चलकर अपनी जान बचानी पड़ी। इन अथक प्रयासों से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, लेकिन अभी भी कई इलाकों में लोग मदद का इंतजार कर रहे हैं।
मंडी-मनाली हाईवे पर जिंदगी का संघर्ष
मंडी-मनाली हाईवे, जो पर्यटकों की जीवनरेखा है, कुदरत के कहर से पूरी तरह तबाह हो गया है। हाल ही में, एक विशाल भूस्खलन ने मंडी-मनाली टनल के मुहाने को बंद कर दिया था, जिसमें करीब 300 पर्यटक तीन दिनों तक फंसे रहे। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से इन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। ब्यास नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया है कि मनाली में कई होटल और रिसॉर्ट भी नदी के तेज बहाव में बह गए। यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि उन्होंने ऐसा विनाश पहले कभी नहीं देखा।
क्या है प्रशासन का प्लान?
राज्य सरकार ने इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया है। बचाव और राहत कार्यों के लिए भारतीय सेना, एनडीआरएफ, और स्थानीय प्रशासन की टीमें दिन-रात काम कर रही हैं। सड़कों को खोलने के लिए 161 जेसीबी, 43 डोजर और 11 टिप्पर मशीनें लगाई गई हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल
दुर्गम और खतरनाक इलाकों में जहां सड़कें पूरी तरह से टूट चुकी हैं, वहां हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर फंसे हुए लोगों तक खाने-पीने का सामान पहुंचा रहे हैं और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल रहे हैं। मंडी, कुल्लू और चंबा के कई दूरदराज के गांवों में अभी भी लोग फंसे हैं, और उन तक पहुंचने का एकमात्र जरिया हवाई मार्ग ही है।
कुदरत का यह गुस्सा लोगों को डरा रहा है, लेकिन हिमाचल के लोग एक-दूसरे की मदद करके इस मुश्किल घड़ी का सामना कर रहे हैं। प्रशासन और सेना की मदद से उम्मीद की किरण बनी हुई है कि हर एक जिंदगी को सुरक्षित बचा लिया जाएगा।
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