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रांची वाईबीएन डेस्क । सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का और रांची के तत्कालीन LRDC कार्तिक प्रभात समेत अन्य दोषियों को सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है और यह आदेश दिया है कि यदि वे जुर्माना अदा नहीं करते हैं तो उन्हें एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। यह मामला CNT एक्ट उल्लंघन से जुड़ा 15 साल पुराना जमीन खरीद-बिक्री कांड है। शुक्रवार को अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया था और शनिवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया। इस केस का ट्रायल सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक प्रियांशु सिंह ने कराया।
कैसे हुआ था घोटाला
सीबीआई की जांच में सामने आया कि एनोस एक्का ने मंत्री रहते हुए पद का दुरुपयोग किया और फर्जी पते का इस्तेमाल कर आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री की। इसमें तत्कालीन LRDC कार्तिक प्रभात ने उनकी मदद की। प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई थी। जांच में पता चला कि मेनन एक्का के नाम पर हिनू में 22 कट्ठा, ओरमांझी में 12 एकड़, नेवरी में 4 एकड़ और चुटिया के सिरम टोली मौजा में 9 डिसमिल जमीन मार्च 2006 से मई 2008 के बीच खरीदी गई थी।
पहले भी हो चुके हैं दोषी
यह पहली बार नहीं है जब एनोस एक्का को सजा सुनाई गई हो। इससे पहले भी वे पारा टीचर हत्याकांड, मनी लॉन्ड्रिंग केस और आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं। यह चौथा मामला है जिसमें उन्हें दोषी पाया गया है। अदालत का यह फैसला झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक जगत के लिए बड़ा संदेश है कि CNT एक्ट के उल्लंघन और आदिवासी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी