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कर्नाटक में गुरुवार को स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं, क्योंकि राज्य में 9,000 से अधिक नर्स और पैरा-मेडिकल कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। यह हड़ताल कर्नाटक राज्य अनुबंध पैरा-मेडिकल कर्मचारी कल्याण संघ द्वारा आयोजित की गई, जो गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रही। हड़ताल की शुरुआत बुधवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क से हुई, जहां पूरे राज्य से आए नर्स और पैरा-मेडिकल कर्मचारी एकत्रित हुए।
"समान काम समान वेतन"
प्रदर्शनकारियों में अधिकतर महिलाएं थीं। उन्होंने "समान काम के लिए समान वेतन", "न्याय हमारा अधिकार है" जैसे नारे लिखी तख्तियां उठाई हुई थीं। महाशिवरात्रि के दिन उन्होंने रातभर वहीं रहकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस हड़ताल से खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे मेडिकल कर्मचारी
प्रदर्शनकारी नर्स और पैरा-मेडिकल कर्मचारी अपने वेतन में बढ़ोतरी और इंटर-डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे पिछले 15 साल से सेवाएं दे रहे हैं, फिर भी उन्हें मात्र 14,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है। वे सरकार से अपनी सेवाओं को स्थायी करने की भी मांग कर रहे हैं।
भाजपा ने किया हड़ताल का समर्थन
भाजपा ने इस हड़ताल का समर्थन किया है और कर्मचारियों की मांगों के साथ एकजुटता दिखाई है। कांग्रेस सरकार ने अभी तक उनकी मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाड़ी नारायणस्वामी और बेंगलुरू ग्रामीण से भाजपा सांसद सी. एन. मंजुनाथ ने बुधवार को प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। भाजपा ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को विधानसभा में उठाया जाएगा और सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
सीएम से बात करेंगे विपक्ष के नेता
नारायणस्वामी ने कहा कि वह मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और स्वास्थ्य मंत्री से इस विषय में बात करेंगे। मंजुनाथ ने भी प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी है और "समान काम के लिए समान वेतन" व उनकी नौकरियों को स्थायी करने की मांग को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि नर्स, तकनीशियन और अन्य पैरा-मेडिकल कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं।