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Uttarakhand Cloudburst : बादल फटने से तबाही, रुद्रप्रयाग में खतरनाक हुई अलकनंदा

उत्तराखंड के चमोली में बादल फटने से केदारघाटी और रुद्रप्रयाग में हाहाकार मचा है। केदारघाटी का एक पुल बह गया, जबकि रुद्रप्रदाग में अलकनंदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। 2013 की आपदा की यादें ताजा हो गई हैं।

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Ajit Kumar Pandey
Uttarakhand Cloudburst : बादल फटने से तबाही, रुद्रप्रयाग में खतरनाक हुई अलकनंदा | यंग भारत न्यूज

Uttarakhand Cloudburst : बादल फटने से तबाही, रुद्रप्रयाग में खतरनाक हुई अलकनंदा | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)

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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क ।  उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को कुदरत का कहर एक बार फिर देखने को मिला है। चमोली जिले में बादल फटने के बाद केदारघाटी और रुद्रप्रयाग में भारी तबाही हुई है। केदारघाटी को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण पुल पानी के तेज बहाव में बह गया, जबकि रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इस घटना ने एक बार फिर 2013 की त्रासदी की यादें ताजा कर दी हैं, जब पूरा उत्तराखंड जलमग्न हो गया था।

इस भयावह घटना के बाद से ही प्रशासन और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें युद्ध स्तर पर बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। चमोली में हुए इस अचानक बादल फटने से कई सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे राहत कार्यों में बाधा आ रही है। केदारनाथ धाम यात्रा भी अस्थायी रूप से रोक दी गई है, क्योंकि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। स्थानीय लोग सहमे हुए हैं और लगातार बारिश ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने भी अगले 48 घंटों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

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Photograph: (X.com)

क्या हुआ केदारघाटी और रुद्रप्रयाग में?

केदारघाटी का पुल बहा: बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ में केदारघाटी को जोड़ने वाला पुल पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। यह पुल इस क्षेत्र के लिए जीवनरेखा था, और इसके बह जाने से कई गांव मुख्यधारा से कट गए हैं।

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अलकनंदा नदी का बढ़ता जलस्तर: रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। नदी किनारे बसे गांवों को खाली कराने का काम जारी है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। 

राहत और बचाव कार्य: जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन टीमों को तुरंत सक्रिय कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद भी ली जा रही है।

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों और बरसाती नालों से दूर रहें और सुरक्षित स्थानों पर ही रुकें। पहाड़ों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे आवागमन और भी मुश्किल हो गया है।

क्यों हो रही हैं ऐसी घटनाएं?

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विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और पहाड़ों में हो रहे अनियंत्रित निर्माण कार्य ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। लगातार हो रही भारी बारिश और अचानक बादल फटने की घटनाएं इसी का परिणाम हैं। पहाड़ों की नाजुक पारिस्थितिकी को नजरअंदाज करना अब हमें भारी पड़ रहा है।

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