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कुदरत की मार से जूझ रहा उत्तराखंड : अब तक 14 की मौत, राहत बचाव कार्य जारी | यंग भारत न्यूज Photograph: (Google)
नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क । उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, चमोली और अन्य जिलों में बादल फटने से भारी तबाही मची हुई है। अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत राहत और बचाव कार्य चलाने के निर्देश दिए हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। आखिर कैसे हुई ये घटना और बचाव के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
उत्तराखंड में मानसून के दौरान बादल फटने की घटनाएं आम हो गई हैं। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और पहाड़ों पर हो रहे अनियंत्रित निर्माण इसका मुख्य कारण हैं। जब एक छोटे से इलाके में अचानक बहुत कम समय में भारी बारिश होती है, तो उसे 'बादल फटना' कहते हैं। रुद्रप्रयाग और चमोली जैसे संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाएं भूस्खलन और बाढ़ का कारण बनती हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान होता है।
मुख्यमंत्री का एक्शन: राहत और बचाव का निर्देश
आपदा की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने आपदा प्रबंधन सचिव और संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार संकट की इस घड़ी में आपदा प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है।” सरकार की प्राथमिकता है कि प्रभावित लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और उन्हें भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता मुहैया कराई जाए।
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बचाव दल मौके पर, सेना की मदद मांगी गई
स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य में जुटी हैं। मुश्किल मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, टीमें मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रही हैं। कई जगहों पर सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे बचाव कार्य में बाधा आ रही है। सरकार ने जरूरत पड़ने पर भारतीय सेना की मदद लेने का भी फैसला किया है।
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