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मुजफ्फरनगर, वाईबीएन न्यूज। माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर मंगलवार (27 अगस्त) को हुए भीषण भूस्खलन में 34 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। मरने वालों में मुजफ्फरनगर के सात लोग भी शामिल थे, इनमें से छह लोग एक ही मोहल्ले, रामपुरी के रहने वाले थे और तीन अलग-अलग परिवारों से ताल्लुक रखते थे। शनिवार को जब सभी शव मोहल्ले पहुंचे तो पूरा इलाका मातम में डूब गया।
एक साथ उठीं छह अर्थियां
सुबह करीब 5:30 बजे शव मोहल्ले लाए गए। परिजनों के बीच चीख-पुकार मच गई। इसके बाद सभी शवों को एक ही लोडर में रखकर हिंडन नदी के किनारे स्थित श्मशान घाट ले जाया गया। वहां सभी का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। श्मशान घाट पर पूर्व सांसद कादिर राणा, भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत, मुजफ्फरनगर सांसद हरेंद्र मलिक और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान भी पहुंचे। हजारों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
पीड़ित परिवारों की व्यथा
शवों को लाने वाले सुमित ने बताया कि जम्मू अस्पताल में हालात बेहद भयावह थे, कमरे में चारों ओर लाशें बिखरी थीं। डॉक्टरों ने कहा- जाकर अपने परिजनों को पहचान लो। हमने लाशें हटाकर अपने छह शव ढूंढे। पीड़ित संदीप कुमार ने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर और मुजफ्फरनगर प्रशासन से किसी तरह की मदद नहीं मिली। शव लाने तक का इंतजाम खुद करना पड़ा।
प्रशासन की घोषणा और मुआवजा
- जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को नौ लाख रुपये का मुआवजा घोषित किया है।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने भी चार लाख रुपये अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की।
- पूर्व सांसद कादिर राणा ने परिजनों को 50,000 रुपये और एक घर बनाने के लिए सरिया देने की बात कही।