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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्कः रवि दहिया जब NIA कोर्ट के स्पेशल जज थे तो उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि दिल्ली पुलिस उनके साथ इस तरह का सलूक भी कर सकती है। वो डेढ़ साल से दिल्ली पुलिस के अफसरों के पास चक्कर काट रहे हैं लेकिन फिर भी उनकी फरियाद नहीं सुनी गई। थक हारकर उनको आम आदमी की तरह से इंसाफ मांगना पड़ गया।
जज को नहीं दिया गया हथियार रखने का लाइसेंस
रवि दहिया की दर्दभरी दास्तां तब शुरू हुई जब त्रिपुरा जूडिशियल सर्विस के मेंबर के तौर पर उनकी पोस्टिंग दिल्ली में की गई। इससे पहले वो त्रिपुरा की NIA कोर्ट में स्पेशल जज के तौर पर तैनात रहे थे। जब वो परिवार के साथ दिल्ली आए तो उनको लगा कि वो सुरक्षित नहीं हैं। NIA कोर्ट का जज रहते ही उनको धमकियां मिलनी शुरू हो गई थीं। पहले तो वो इनको नजरंदाज करते रहे लेकिन जब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा तो वो दिल्ली पुलिस के पास गए। पुलिस के अफसरों को सारी कहानी बताई और फिर उनको एक दरख्वास्त दी। इसके मुताबिक रवि दहिया एक आर्म लाइसेंस लेना चाहते थे। जिससे मुसीबत पड़ने पर वो अपनी रक्षा कर सकें।
नवंबर 2023 से पुलिस ने रोककर रखी है उनकी फाइल
जज को लगता था कि वो स्पेशल हैं तो उनका काम पलक झपकते ही हो जाएगा। लेकिन जल्दी ही उनको हकीकत का एहसास होने लगा। नवंबर 2023 में जो आवेदन आर्म लाइसेंस के लिए पुलिस को दिया गया था उस पर कोई कार्यवाही ही नहीं की गई। दहिया राह तकते रहे कि पुलिस उनको बताएगी कि उनका काम हो गया है। एक तरफ परिवार पर खतरा तो दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस की बेरुखी। दहिया की हिम्मत जवाब दे गई।
थक गए तो दिल्ली हाईकोर्ट से मांगा इंसाफ
थक हारकर उन्होंने एक आम आदमी की तरह से इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ने का फैसला किया। वो दिल्ली हाईकोर्ट गए और एक रिट दायर करके इंसाफ की गुहार की। जस्टिस सचिन दत्ता की नजर उनकी रिट पर पड़ी तो वो हत्थे से उखड़ गए। उनका कहना था कि पुलिस ये क्या कर रही है। एक जज की जान पर खतरा है और उसको धक्के खिलाए जा रहे हैं। जस्टिस दत्ता ने आदेश दिया कि दिल्ली पुलिस और सरकार रवि दहिया की याचिका पर चार हफ्ते के भीतर फैसला करे। हालांकि हाईकोर्ट को लगता नहीं है कि पुलिस या सरकार के अफसर इतनी जल्दी मान जाएंगे। जस्टिस दत्ता ने रवि दहिया से कहा कि काम न हो तो वो कानूनी कदम उठाने को स्वतंत्र हैं।
बोले- त्रिपुरा में रही पोस्टिंग, मिल रहीं धमकियां
हाईकोर्ट के फैसले के बाद दहिया का कहना है कि जब एक जज का ये हाल है तो आम आदमी के साथ कैसा सलूक किया जाता होगा। उनका कहना है कि नवंबर 2023 के बाद से वो दिल्ली पुलिस के साथ अफसरों के दफ्तरों के कई सारे चक्कर काट चुके हैं। पर उनकी बात भी कोई नहीं सुन रहा। वो अपने परिवार के साथ कहीं जाते हैं तो जान पर हमेशा खतरा महसूस होता है। वो त्रिपुरा जैसी जगह पर रहे हैं जहां आतंकी गतिविधियां चरम पर थीं। उन्हें नहीं पता कि कब कौन उनको या परिवार को निशाना बना दे। वो तो केवल इतना चाहते हैं कि उनको एक हथियार रखने की अनुमति दिल्ली सरकार दे। कभी कुछ हो तो वो खुद अपनी व परिवार की रक्षा कर सकें।
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