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Photograph: (file)
नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्कःलुधियाना वेस्ट का उपचुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहा है आप के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल की सांसें अटकने लगी हैं। उनको पता है कि अगर आप ये चुनाव हार गई तो उनके लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। पार्टी को संभालना भारी पड़ जाएगा। यही वजह है कि केजरीवाल दिन रात एक करके अपने प्रत्याशी संजीव अरोड़ा की जीत को यकीनी बनाने में जुटे हैं। उनके साथ उनकी सारी टीम है जिसमें मनीष सिसोदिया भी शामिल हैं। arvind kejriwal news | aap Punjab
लुधियाना वेस्ट में 19 को वोटिंग, 23 को आएगा नतीजा
चुनाव आयोग ने जो खाका चुनाव के लिए खींचा है उसके तहत 19 जून को लुधियाना वेस्ट के चुनाव के लिए वोटिंग होगी। गिनती 23 जून को रखी गई है। इस सीट पर इससे पहले आप का ही कब्जा था। गुरप्रीत सिंह गोगी ने ये सीट 2022 में जीती थी। 11 जनवरी को उनके निधन के बाद उपचुनाव की नौबत आई। नियम कहते हैं कि कोई सीट खाली होने के छह माह के भीतर चुनाव कराना होता है। चुनाव आयोग ने इसी नियम को ध्याम में रखकर चुनाव का खाका खींचा है।
केजरीवाल समेत दिल्ली के सारे बड़े नेता पंजाब शिफ्ट
अरविंद केजरीवाल की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि हाल ही में हुए दिल्ली असेंबली के चुनाव में वो भारी अंतर से हारे थे। 70 सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी ने उनको तगड़ी पटखनी दी। बीजेपी ने 48 सीटों पर जीत हासिल की जबकि आप 22 पर ही सिमट गई। खुद केजरीवाल नई दिल्ली सीट से चुनाव गंवा बैठे। दिल्ली हारने के बाद केजरीवाल पंजाब की तरफ शिफ्ट हो गए। दिल्ली की कमान उन्होंने अतिशि और सौरभ भारद्वाज के हवाले कर दी। देखा जाए तो इस समय दिल्ली का सारा ताकतवर अमला पंजाब में मौजूद है। मनीष सिसोदिया पंजाब के प्रभारी हैं तो सतेंद्र जैन उनके असिस्टेंट। केजरीवाल के पीए रह चुके विभव कुमार भगवंत मान के सलाहकार का काम देख रहे हैं। यानि दिल्ली की सारी ताकत फिलहाल पंजाब में काम कर रही है।
दिल्ली में हार के बाद केजरीवाल का पहला चुनाव
केजरीवाल ने सोच समझकर ही राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को चुनाव मैदान में उतारा है। संजीव लुधियाना के जाने माने बिजनेस मैन हैं। माना जा रहा है कि वो जीते तो भगवंत मान की कैबिनेट में उनको शामिल किया जाएगा। केजरीवाल खुद उनके लिए गलियों की खाक छान रहे हैं। वो वोटरों को रिझाने का कोई तरीका जाया नहीं कर रहे। केजरीवाल को पता है कि दिल्ली की हार के बाद ये पहला चुनाव है। अगर इसमें हारे तो इसका असर दिल्ली तक जाएगा। संदेश होगा कि केजरीवाल अपनी चमक खो चुके हैं। वैसे भी 2027 में पंजाब असेंबली इलेक्शन होना है। अगर उपचुनाव हार गए तो 2027 के लिए वर्कर्स को बांधना मुश्किल पड़ सकता है।
कांग्रेस और बीजेपी के लिए भी चुनाव बेहद अहम
केजरीवाल के साथ बीजेपी और कांग्रेस के लिए भी चुनाव बेहद अहम है। बीजेपी ने इस सीट से जीवन गुप्ता को टिकट दी है। जबकि कांग्रेस ने भारत भूषण आशू को मैदान में उतारा है। अकाली दल का भरोसा परउपकार सिंह घुम्मण पर है। 1977 में बनी इस सीट पर अब तक 10 चुनाव हो चुके हैं। इनमें से ज्यादा में कांग्रेस ने बाजी मारी है। कहने की जरूरत नहीं कि कांग्रेस के लिए भी इस सीट को फिर से अपने कब्जे में लेना कितना अहम है। 2024 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने अपनी ताकत दिखाई थी। उसके 7 नेता चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे थे। जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी शिकस्त हुई थी। कांग्रेस अपने ग्राफ को नीचे नहीं जाने देना चाहती। यही वजह है कि कांग्रेस के नेता भी शिद्दत से चुनावी रणनीति बना रहे हैं।
बीजेपी के लिए ये सीट इस वजह से भी अहम है क्योंकि रवनीत सिंह बिट्टू लोकसभा चुनाव हार गए थे लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी ने फिर भी उनको केंद्रीय कैबिनेट में जगह दी। मोदी बिट्टू पर दांव खेलना चाहते हैं। वो रहने वाले लुधियाना के ही हैं। जाहिर है कि ये चुनाव उनके लिए बेहद अहम है। अगर बीजेपी के जीवन गुप्ता हारे तो बिट्टू का दिल्ली में कद कम हो सकता है।
कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 6 बार जीत हासिल की
लुधियाना वेस्ट की सीट 1977 में अस्तित्व में आई थी। तब इस सीट से जनता पार्टी के ए विश्वनाथन जीते थे। 1980 में कांग्रेस ने हरनाम दास जौहर को यहां से उतारा। जौहर ने 1980, 1985, 1992, 2002 में इस सीट से जीत दर्ज की। उनको इसका ईनाम भी मिला। वो पंजाब कैबिनेट के साथ असेंबली के अहम पदों पर बिठाए गए। कांग्रेस के मौजूदा प्रत्याशी भारत भूषण आशू इस सीट से 2012 और 2017 में चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे थे। आप ने उनके ही हाथों से सीट छीनी थी। अकाली दल इस सीट से 2 बार जीत हासिल कर चुका है।
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