/young-bharat-news/media/media_files/2025/08/29/dr-rachana-gupta-2025-08-29-18-20-43.jpg)
डॉ. रचना गुप्ता, पूर्व सदस्य हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग Photograph: (Young Bharat)
डॉ. रचना गुप्ता, पूर्व सदस्य हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के लंबे अरसे के बाद, संघ शताब्दी के व्याख्यान से ना सिर्फ़ संघ, बल्कि भाजपा को भी, राष्ट्र की आगामी नीति की दिशा और दशा दोनों मिली है। भागवत का सुस्पष्ट रोड मैप ना सिर्फ तमाम अटकलों को विराम लगा गया है बल्कि जो भ्रम या भय अवधारणाओं में था, उस पर भी पूर्ण सपष्टता आ गई है। संघ अब 100 बरस का हो गया है, इसलिए ज़्यादा वयवहारिक और परिपक्वता के साथ अखंड भारत यानी अविभाजित देश की सशक्त इच्छा के साथ नीति नियमों में आगे बढ़ेगा।
भागवत द्वारा, संघ-भाजपा संबंध, जनसंख्या नियंत्रण, घुसपैठ, अखंड भारत, नेतृत्व की आयु सीमा और धार्मिक-सांस्कृतिक आंदोलनों में स्वयंसेवकों की भूमिका, जैसे विषयों पर बिंदास बोलने से, संघ का नया नैरेटिव पेश किया गया है। यह वक्तव्य केवल संघ की दिशा ही नहीं दिखाता, बल्कि भाजपा की राजनीति और उसकी आगामी रणनीति पर भी गहरा असर डालता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार चुनाव तैयारी के दौर में है और विपक्ष भाजपा-संघ की एकजुटता पर लगातार सवाल उठा रहा है।
भागवत का वक्तव्य भाजपा को वैचारिक स्पष्टता और राजनीतिक मजबूती दोनों देता है। संघ-भाजपा संबंधों में विश्वास और नेतृत्व की स्थिरता से संगठन को आत्मबल देने वाला है, जबकि जनसंख्या नीति, घुसपैठ और अखंड भारत जैसे मुद्दे चुनावी विमर्श को भाजपा के पक्ष में मोड़ सकते हैं। दूसरी ओर, विपक्ष यानी कांग्रेस के प्रति अपनी राय दे कर, देश हित में एकजुटता का संदेश भी दिया है।
भागवत की ओर से रखे गए विचार के गहरे मायने
संघ के जितने भी विचार कल भागवत की ओर से कहे गए,वह गहरे मायने लिए हैं,जो भाजपा सरकार की भूमिका को भी बता रहे हैं। बात एक - एक विषय की करते हैं-भागवत ने कहा कि भाजपा अपने राजनीतिक निर्णय स्वतंत्र रूप से लेती है और संघ केवल वैचारिक सहयोगी है। इसने उन सभी अटकलों को खारिज कर दिया कि भाजपा संघ की कठपुतली है। इससे भाजपा को भी संगठनात्मक मजबूती और आत्मविश्वास मिला है।
दूसरा, हाल के दिनों में यह चर्चा थी कि भाजपा में 75 वर्ष की आयु सीमा लागू हो सकती है। भागवत ने स्पष्ट किया कि यह नियम संवैधानिक पदों से संबंधित नहीं है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत शीर्ष नेतृत्व की स्थिरता का संदेश गया और पार्टी कार्यकर्ताओं में भरोसा मजबूत हुआ। घुसपैठ और सुरक्षा विमर्श पर भागवत ने घुसपैठ को गंभीर राष्ट्रीय समस्या बताते हुए इसे रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भाजपा के लिए यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC जैसे मुद्दे उसकी राजनीतिक पहचान से जुड़े हैं। यह वक्तव्य भी भाजपा को राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के सवाल पर और मजबूती देता है। अखंड भारत और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर भागवत ने अखंड भारत की अवधारणा को राजनीतिक लक्ष्य से अधिक सांस्कृतिक और भावनात्मक बताया है। भाजपा के लिए यह बयान हिंदुत्व आधारित विमर्श के साथ सर्व धर्म साथ की बात भी कहता है।
उधर, धार्मिक आंदोलनों पर संतुलन काशी और मथुरा के संदर्भ में भागवत ने कहा कि संघ स्वयं इन आंदोलनों का हिस्सा नहीं बनेगा, लेकिन स्वयंसेवक स्वतंत्र हैं। यह संतुलित संदेश भाजपा को धार्मिक मतदाताओं तक पहुंच बनाए रखने में मदद करेगा, साथ ही उस आरोप को भी कमजोर करेगा कि संघ सीधे धार्मिक आंदोलनों को संचालित करता है।
कुल मिला कर मोहन भागवत का यह वक्तव्य भाजपा को वैचारिक स्पष्टता और राजनीतिक मजबूती दोनों देता है।
तीन बच्चे नीति: असमानता दूर करने का रास्ता
संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का “तीन बच्चे नीति” पर वक्तव्य अचानक नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रही राष्ट्रीय बहस का हिस्सा है। लेकिन इसका समय और संदर्भ इसे खास महत्व देते हैं, क्योंकि भारत इस समय न केवल दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, बल्कि बेरोज़गारी, संसाधनों पर दबाव और सामाजिक असंतुलन जैसी चुनौतियों से भी जूझ रहा है।
इसका अर्थ यह है कि संघ जनसंख्या को केवल संख्या के रूप में नहीं, बल्कि संतुलन के दृष्टिकोण से देख रहा है। भागवत का मूल संदेश यह था कि जनसंख्या का आकार नहीं, बल्कि उसका संतुलन सबसे बड़ी चुनौती है। यदि किसी समाज या समुदाय की वृद्धि दर बाकी के मुकाबले बहुत तेज़ हो जाए तो दीर्घकालिक रूप से असमानताएं और तनाव पैदा हो सकते हैं। इस संदर्भ में तीन बच्चे नीति को वे संतुलन बनाए रखते हैं। हालांकि इसके पीछे उन्होंने वैज्ञानिक कारण बतायें हैं, जो सीधे तौर पर धर्म से विषय को नहीं जोड़ती।
भाजपा और संघ दोनों लंबे समय से जनसंख्या असंतुलन को एक राष्ट्रीय मुद्दा मानते आए हैं। चुनावी राजनीति में यह मुद्दा अक्सर धार्मिक आधार पर भी उठाया जाता है। भागवत का यह बयान भाजपा के लिए लाभकारी हो सकता है क्योंकि यह उसके समर्थक वर्ग की चिंताओं को प्रतिध्वनित करता है। यह बयान केवल जनसंख्या नियंत्रण की बहस नहीं है, बल्कि भारत की सामाजिक संरचना, संसाधनों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विमर्श भी है।
RSS Centenary Lecture | Mohan Bhagwat Speech | RSS BJP Policy | Akhand Bharat Debate