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GST करप्शनः शाहजहांपुर में बोगस फर्म से पांच माह में करोड़ों का कारोबार और 10 करोड़ का ITC क्लेम, एफआईआर दर्ज, एसी निलंबित

शाहजहांपुर में बोगस फर्म से पांच माह में करोडों का कारोबार करके 10 करोड आइटीसी यानी इनपुट क्रेडिट टैक्स का भी दावा कर दिया। पकडे जाने पर डीसी ने फर्म व स्वामी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। शासन ने डिप्टी कमिश्नर भावना चंद्रा को निलंबित कर दिया है।

Narendra Yadav & Ambrish Nayak
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Photograph: (वाईबीएन नेटवर्क)

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शाहजहांपुर वाईबीएन संवाददाता। जिले में राज्य कर विभाग ने एक बड़े टैक्स फ्रॉड का राजफाश किया है। एक बोगस फर्म ने महज पांच माह में करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाते हुए करीब 10 करोड़ रुपये अधिक का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर लिया। मामला सामने आने पर राज्य कर विभाग में खलबली मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय उच्चाधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फर्म स्वामी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के साथ संबंधित कर निर्धारण क्षेत्र अधिकारी सहायक आयुक्त भावना चंद्रा को निलंबित कर दिया है।

यह है पूरा मामला 

इसी वर्ष मार्च में सिंह इंटरप्राइजेज (GSTN–09KJYPS8827Q1ZA) नाम से मंदीप सिंह नाम के व्यक्ति ने फर्म का पंजीयन कराया। जिसमें फर्म का पता शाहजहांपुर में रेती रोड तथा कारोबारी ने खुद को नगला दुली, ताखा, भरथना, इटावा निवासी दर्शाया। खास बात यह रही कि फर्म ने केवल पांच माह के भीतर तीन अन्य फर्मों से फर्जी खरीद बिक्री दिखाकर लगभग 10 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर लिया। जब अधिकारियों ने जांच की तो फर्म पूरी तरह अस्तित्वहीन (फर्जी) पाई गई। अब मामले में कार्रवाई हुई है।

मार्च और अप्रैल में बडा फर्जीवाड़ा

रोजा थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार फर्म ने— मार्च 2025 में ₹42,14,080 की सप्लाई दिखाकर 7,58,534 की कर देयता स्वीकार की। अप्रैल 2025 में ₹45,40,56,900 की सप्लाई दिखाकर 1,07,07,80,32 (107 करोड़ से अधिक) की कर देयता प्रदर्शित की। इन सभी देयताओं को बोगस ITC के माध्यम से समायोजित किया गया। अप्रैल माह में कोई ई-वे बिल जारी नहीं किया गया। बिना वास्तविक माल की सप्लाई किए, फर्जी बिलिंग के माध्यम से सरकार को ₹107,83,66,566/- (करीब 107.8 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ।

फर्जी आईटीसी में शामिल अन्य फर्में

सिंह इंटरप्राइजेज ने फर्जी खरीद-बिक्री दिखाते हुए अन्य फर्मों को भी बोगस आईटीसी का लाभ दिया

1. Sajid Enterprises (GSTN–09DUJPS9005M1ZU)

2. Sushma Sales Corporation (GSTN–36AILPM2839G1Z1, Active)

3. Maa Durga Traders (GSTN–07JQTPS8698A1ZQ, Cancel)

जांच में पता चला कि उक्त फर्में भी वास्तविक व्यापार में शामिल नहीं थीं और उनके माध्यम से बोगस आईटीसी का लाभ उठाया गया।

एसी ने दर्ज कराई एफआईआर

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राज्य कर विभाग की डिप्टी कमिश्नर भावना चंद्रा ने इस गंभीर फर्जीवाड़े के सामने आने पर फर्म और उसके स्वामी मंदीप सिंह, पुत्र अनिल कुमार, निवासी नगला दुली, ताखा, भरथना, इटावा के खिलाफ थाना रोजा में एफआईआर दर्ज कराई। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और जीएसटी अधिनियम की धारा 132 के तहत पंजीकृत हुई। शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी कमिश्नर भावना चंद्रा को निलंबित कर दिया। सूत्रों के अनुसार, विभागीय जांच में कई स्तर पर लापरवाही उजागर हुई है।

पुलिस और राज्य कर विभाग की संयुक्त जांच

थाना रोजा के इंस्पेक्टर गंगा सिंह को मामले की जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। पुलिस और राज्य कर विभाग की संयुक्त टीम आरोपी फर्म स्वामी की तलाश कर रही है। जांच में फर्म के व्यापार स्थल, दस्तावेज और GST पोर्टल के रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है।

करोड़ों का राजस्व नुकसान

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि फर्म ने बिना माल की वास्तविक सप्लाई किए फर्जी बिलिंग और ई-वे बिलों के माध्यम से सरकार को करीब 107 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। इस फ्रॉड में राज्य कर कानूनों और GST अधिनियम का उल्लंघन हुआ है।

वर्जन 

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बोगस फर्म से फर्जी कारोबार कर दस करोड आइटीसी क्लेम का मामला पकड में आया है। जांच के दौरान फर्म पंजीयन में जो पता दर्शाया गया वहां पर कोई भी कारोबार नहीं मिला। मामले में चेन बनाकर फर्जी कारोबार करने वाली चारों फर्म व स्वामी के विरुद्ध रोजा थाना में प्राथमिकी पंजीकृत कराई गई है। सहायक आयुक्त भावना चंद्रा के विरुद्ध निलंबन की मौखिक जानकारी मिली है, शासन से अभी कोई पत्र नहीं आया है। 

-प्रवेश तोमर, उपायुक्त, राज्य कर विभाग

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