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कौन हैं Divya Deshmukh ? जिनकी सफलता पर झूम उठा देश, राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक ने जमकर सराहा

ग्रैंडमास्टर दिव्या देशमुख ने FIDE महिला शतरंज विश्व कप 2025 जीतकर इतिहास रच दिया। 19 वर्षीय दिव्या यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने हम्पी को हराया। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री फडणवीस ने उनकी सराहना की।

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Suraj Kumar
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नई दिल्‍ली, वाईबीएन स्‍पोर्ट्स। ग्रैंडमास्‍टर दिव्‍या देशमुख ने FIDE विमेंस वर्ल्‍ड कप जीतकर इतिहास रच दिया। 19 वर्षीय दिव्‍या ये टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। उनकी इस सफलता से पूरा देश खुश है। राष्‍ट्रपति से लेकर पीएम तक सभी ने उनको बधाई दी। जॉर्जिया में आयोजित FIDE वुमेंस वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में हमवतन कोनेरू हंपी को रोमांचक मुकाबले में हराकर उन्‍होंने ये खिताब अपने नाम किया। 

divya deshmukh

पांच साल की उम्र से खेल रही हैं दिव्‍या 

9 दिसंबर 2005 को नागपुर में जन्मीं दिव्या ने पांच साल की उम्र से शतरंज खेलना शुरू किया। उनके माता-पिता डॉक्टर हैं। उनके पिता का नाम जितेंद्र और मां का नाम नम्रता है। दिव्या ने 2012 में सात साल की उम्र में अंडर-7 नेशनल चैंपियनशिप जीती। इसके बाद उन्होंने अंडर-10 (डरबन, 2014) और अंडर-12 (ब्राजील, 2017) कैटेगरी में विश्व युवा खिताब भी जीते। इसके बाद 2014 में डरबन में आयोजित अंडर-10 वर्ल्ड यूथ टाइटल और 2017 में ब्राजील में अंडर-12 कैटेगरी में भी खिताब अपने नाम किए। 

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दिव्‍या के परिवार ने जताई खुशी

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दिव्या देशमुख की शानदार उपलब्धि पर उनके परिवार ने गर्व जताया और इसे पूरे परिवार, नागपुर, महाराष्ट्र और भारत के लिए सम्मान की बात बताया। उनकी चाची स्मिता देशमुख ने पत्रकारों से कहा, "हम बेहद खुश हैं कि दिव्या ने देश और परिवार का नाम रोशन किया है। भारत ने कई वर्षों बाद महिला शतरंज विश्व कप जीता है, जो हमारे लिए गर्व का पल है। हम ईश्वर का धन्यवाद करते हैं। उनके माता-पिता की वर्षों की मेहनत अब रंग लाई है। हमारी खुशी बयां नहीं की जा सकती और आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। हम चाहते हैं कि दिव्या भविष्य में और ऊंचाइयों तक पहुंचे और देश को बार-बार गौरवान्वित करे। हम उनके घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।”

Divya Deshmukh wins FIDE Women's World Cup: Her journey

ये तो सिर्फ शुरुआत है- दिव्‍या 

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दिव्या ने अनुभवी हमवतन कोनेरू हम्पी को हराने के बाद कहा, ‘‘मुझे इसे (जीत को) आत्मसात करने ने के लिए समय चाहिए। मुझे लगता है कि यह नियति की बात थी कि मुझे इस तरह ग्रैंडमास्टर का खिताब मिला क्योंकि इस (टूर्नामेंट) से पहले मेरे पास एक भी (ग्रैंडमास्टर) नॉर्म नहीं था और अब मैं ग्रैंडमास्टर हूं।’’ इस मुकाबले के दौरान पेशे चिकित्सक दिव्या की मां भी वहां मौजूद थी। दिव्या दो बार की विश्व रैपिड चैंपियन हम्पी को टाई-ब्रेकर में हराने के बाद भावनाओं पर काबू नहीं रख सकी और अपनी मां से गले मिलने के दौरान उनकी आंखें नम थी। दिव्या ने कहा, ‘‘मेरे लिए अभी बात करना मुश्किल है। यह वाकई बहुत मायने रखता है, लेकिन अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि यह सिर्फ एक शुरुआत है।’’ दिव्या इस उपलब्धि के साथ हम्पी, द्रोणावल्ली हरिका और आर. वैशाली के बाद ग्रैंडमास्टर बनने वाली चौथी भारतीय महिला बन गईं।

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सीएम फडणवीस ने दिव्‍या को दी बधाई 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को नागपुर की दिव्या देशमुख को फिडे महिला शतरंज विश्व कप 2025 जीतने के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह इस शहर और राज्य के लोगों के लिए गर्व का क्षण है।

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मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह बड़ी खुशी का क्षण है कि नागपुर और महाराष्ट्र की बेटी दिव्या देशमुख ने महिला विश्व कप जीता है और साथ ही ग्रैंडमास्टर का नॉर्म भी हासिल किया है। वह इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की शतरंज खिलाड़ी हैं।’’फडणवीस ने हम्पी को भी बधाई देते हुए कहा, ‘‘मैं हम्पी को भी बधाई देना चाहता हूं, क्योंकि वह भी बहुत अच्छी खिलाड़ी हैं। नागपुर और महाराष्ट्र के लोगों के लिए यह बड़े गर्व का क्षण है कि हमारी बेटी (दिव्या देशमुख) इतनी कम उम्र में ग्रैंडमास्टर बन गई है।’’

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