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Big News: UP के 5000 सरकारी स्कूलों के विलय पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार

उत्तर प्रदेश सरकार के 5000 प्राइमरी स्कूलों को बंद कर नजदीकी स्कूलों में विलय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार। याचिका में शिक्षा के अधिकार कानून के उल्लंघन की बात कही गई है।

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Dhiraj Dhillon
SUPREME COURT 19 august 2025

Photograph: (Google)

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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। Supreme Court News: उत्तर प्रदेश के लगभग 5000 सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के नजदीकी स्कूलों में विलय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए हामी भर दी है। यह याचिका तैय्यब खान सलमानी द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रदीप कुमार यादव ने जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष जल्द सुनवाई की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। बता दें कि ‌कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सोमवार को लखनऊ में इस मामले को लेकर योगी सरकार पर गरीब व वंचित वर्ग के बच्‍चों से शिक्षा का अधिकार छीनने का आरोप लगाया है।

याचिका में क्या कहा गया है?

याचिका में दावा किया गया है कि इस फैसले से 3.5 लाख से अधिक छात्रों को मजबूरी में महंगे प्राइवेट स्कूलों का रुख करना पड़ेगा। साथ ही, यह भी कहा गया है कि कई स्कूलों का विलय ऐसे स्कूलों से किया जा रहा है, जिनके रास्ते में नदी, नाला, हाइवे या रेलवे ट्रैक जैसी बाधाएं हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

हाईकोर्ट का फैसला और याचिका की चुनौती

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीतापुर के 51 छात्रों द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए स्कूल मर्जर नीति को वैध करार दिया था। कोर्ट ने कहा था कि सरकार का यह फैसला "बच्चों के हित में" है और यह नीतिगत निर्णय है। नीतिगत निर्णयों में तब तक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता जब तक वह असंवैधानिक या दुर्भावनापूर्ण न हो। हाईकोर्ट केइस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया है कि यह फैसला शिक्षा के अधिकार कानून (RTE Act) का उल्लंघन करता है।

लखनऊ में 445 स्कूलों पर असर, राज्य भर में विरोध

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राजधानी लखनऊ में ही करीब 445 स्कूलों के विलय की योजना है। वहीं, प्रदेशभर में शिक्षक संगठनों ने इस निर्णय का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा, बल्कि छात्रों को लंबे और जोखिम भरे रास्तों से होकर स्कूल जाना पड़ेगा। सरकार का तर्क है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2023-24 के बीच राज्य में सरकारी स्कूलों की संख्या में 8% की कमी आई है, जबकि प्राइवेट स्कूलों की संख्या में 14.9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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