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ceasefire पर देश में नाराजगी: "इंदिरा होना आसान नहीं" के लगे पोस्टर, संसद सत्र बुलाने की मांग

ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तीन दिन तक चली तनातनी शनिवार को अमेरिका के हस्तक्षेप से सीजफायर पर खत्म हुई। इस फैसले से देश के भीतर नाराजगी देखने को मिल रही है।

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Ranjana Sharma
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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क:पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को रोकने के लिए दोनों देशों ने शनिवार को अमेरिका के हस्तक्षेप के बाद सीजफायर पर सहमति जताई, लेकिन इस फैसले से देश के भीतर नाराजगी का माहौल बन गया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर आतंकी हमलों के जवाब में निर्णायक कार्रवाई के बाद भारत ने पीछे क्यों हटने का फैसला किया।

दिल्ली में लगे पोस्टर: "इंदिरा होना आसान नहीं"

रविवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय के बाहर कुछ पोस्टर लगाए गए जिनमें लिखा था – “इंदिरा होना आसान नहीं है” और “भारत को इंदिरा की याद आती है। ये पोस्टर सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं, जहां कई लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से कर रहे हैं और वर्तमान नेतृत्व की आलोचना कर रहे हैं।

विपक्ष का हमला: संसद में विशेष सत्र की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सीजफायर के फैसले पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को देश को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि अचानक सीजफायर की जरूरत क्यों पड़ी, जबकि सेना ने आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की थी।

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह किया था। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी। सेना के मुताबिक, ये आतंकी शिविर लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के प्रशिक्षण केंद्र थे, जिनमें कई आतंकवादी भारत में घुसपैठ की तैयारी कर रहे थे।

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जनता और सोशल मीडिया पर गुस्सा

सीजफायर की घोषणा के बाद से सोशल मीडिया पर भी मोदी सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। कई यूजर्स का कहना है कि सरकार ने आतंक के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई को अधूरा छोड़ दिया। वहीं कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत को झुकना पड़ा? ceasefire Operation Sindoor

Operation Sindoor Ceasefire
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