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तुलसी जयंती हर वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। यह तिथि श्रावण मास की अमावस्या के सातवें दिन भी हो सकती है। इस दिन भक्तजन गोस्वामी तुलसीदास की जयंती को उत्साह और भक्ति के साथ स्मरण करते हैं, खासकर उनके द्वारा रचित रामचरितमानस का पाठ और भगवान राम, माता सीता, और हनुमान जी की पूजा-अर्चना करके। इस वर्ष यह तुलसीदास जी की 528वीं जयंती होगी। उनका बचपन का नाम रामबोला था, क्योंकि जन्म के समय उनके मुख से पहला शब्द "राम" निकला था।
तुलसी जयंती का महत्व
तुलसी जयंती का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्व है। यह दिन महान संत, कवि और दार्शनिक गोस्वामी तुलसीदास के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें हिंदी साहित्य और भक्ति परंपरा में अद्वितीय स्थान प्राप्त है। तुलसीदास जी को रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, और अन्य रचनाओं जैसे कवितावली, विनयपत्रिका, और गीतावली के लिए जाना जाता है। उनकी रचनाओं ने न केवल हिंदी साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि भगवान राम की भक्ति को जन-जन तक पहुंचाया।
धार्मिक महत्व
तुलसीदास जी भगवान राम के अनन्य भक्त थे और उनकी रचनाएं सगुण भक्ति की भावना को दर्शाती हैं। रामचरितमानस, जो कि वाल्मीकि रामायण का अवधी भाषा में पुनर्लेखन है, ने भगवान राम के जीवन, मर्यादा, और आदर्शों को सामान्य जनमानस तक सरल और सहज भाषा में पहुँचाया। यह ग्रंथ आज भी लाखों हिंदू परिवारों में पूजनीय है और इसका पाठ धार्मिक अनुष्ठानों का अभिन्न अंग है। तुलसी जयंती के दिन मंदिरों और घरों में रामचरितमानस का पाठ, हनुमान चालीसा का जाप, और राम दरबार की पूजा की जाती है। यह दिन भक्तों के लिए भगवान राम और हनुमान जी के प्रति अपनी भक्ति को गहरा करने का अवसर प्रदान करता है।
सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्व
तुलसीदास जी को हिंदी साहित्य में एक क्रांतिकारी कवि माना जाता है। उन्होंने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना करके हिंदी को जनभाषा के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी रचनाएँ न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों को भी प्रोत्साहित करती हैं। रामचरितमानस में तत्कालीन समाज की विसंगतियों पर व्यंग्य और नैतिकता की स्थापना का प्रयास देखा जा सकता है। तुलसीदास जी की लेखनी ने भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म को विदेशी आक्रमणों के दौर में जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी रचनाएँ आज भी विद्वानों और बुद्धिजीवियों के लिए शोध का विषय हैं।
तुलसीदास का जीवन और प्रेरणा
तुलसीदास का जन्म 1532 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के राजापुर (बांदा या चित्रकूट) में हुआ था। उनका बचपन का नाम रामबोला था, क्योंकि जन्म के समय उनके मुख से पहला शब्द "राम" निकला था। मान्यता है कि वे महर्षि वाल्मीकि के अवतार थे। उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उनकी पत्नी रत्नावली ने उन्हें उपदेश दिया कि यदि वे अपने प्रेम को भगवान राम की भक्ति में लगाएँ तो उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। इस घटना ने तुलसीदास को राम भक्ति की ओर प्रेरित किया।
उत्सव का स्वरूप
तुलसी जयंती के दिन भक्तजन प्रभु राम, माता सीता, और हनुमान जी की पूजा करते हैं। घरों में राम दरबार स्थापित कर घी का दीपक जलाया जाता है और तुलसी की माला से दोहों का जाप किया जाता है। चित्रकूट के रामघाट जैसे स्थानों पर विशेष आयोजन होते हैं, जहाँ तुलसीदास को भगवान राम के दर्शन हुए थे। इस दिन भक्ति भजनों, झांकियों, और शोभायात्राओं का आयोजन भी किया जाता है।
तुलसी जयंती केवल एक जन्मोत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, साहित्य, और सनातन धर्म के प्रति तुलसीदास जी के योगदान को स्मरण करने का अवसर है। उनकी रचनाएँ आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। यह दिन हमें उनके आदर्शों को अपनाने और राम भक्ति में लीन होने की प्रेरणा देता है। Tulsi Jayanti 2025 | hindu | hindu bhagwa | bhagwa Hindutva | hindu god | hindu guru | Hindu festivals | hindu festival Ram bhakt Tulsidas