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Ghaziabad Crime - सहकारी समितियों के नाम पर करोड़ों की ठगी, आवास विकास परिषद ने शुरू की सख्त कार्रवाई

साहिबाबाद में सहकारी समितियों के नाम पर हो रही ठगी ने सैकड़ों लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। आवास विकास परिषद की ओर से शुरू की गई जांच और मुकदमों से उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।

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Kapil Mehra
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गाजियाबाद, वाईबीएन संवाददाता

साहिबाबाद में आवास विकास परिषद के प्लॉट और फ्लैट दिलाने के नाम पर कई सहकारी समितियों द्वारा लोगों के साथ ठगी के मामले सामने आए हैं। अब तक परिषद के पास 20 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े की शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन शिकायतों के आधार पर परिषद ने तीन सहकारी समितियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है, जबकि अन्य समितियों की विभागीय जांच चल रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जांच-पड़ताल के किसी भी योजना में पैसा न लगाएं।

ठगी का जाल

सहकारी अधिकारी अरिमर्दन गौड़ ने बताया कि कई लोग कम पैसे में बड़ा मुनाफा कमाने के लालच में पड़कर बिना खोजबीन किए सहकारी समितियों और बिल्डरों पर भरोसा कर लेते हैं। इस तरह की समितियां आकर्षक ऑफर और झूठे वादों के जरिए लोगों को ठग रही हैं। परिषद के पास अब तक प्राप्त शिकायतों में सबसे बड़ा मामला मैसर्स सोलरीस इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का है, जिस पर करीब 20 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।

मैसर्स सोलरीस का फर्जीवाड़ा

मैसर्स सोलरीस इंफ्रा प्रोजेक्ट्स ने दावा किया था कि उनके पास ग्रेटर नोएडा में आवास विकास परिषद की 10 एकड़ जमीन है, जिसके आधार पर उन्होंने लोगों से प्लॉट और फ्लैट के लिए मोटी रकम वसूली। जांच में पता चला कि परिषद ने इस बिल्डर को कोई जमीन आवंटित ही नहीं की थी। यह पूरी तरह से फर्जीवाड़ा था, जिसके तहत सैकड़ों लोगों को ठगा गया। परिषद ने इस मामले में बिल्डर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

रेल निगम और तुर्मांचल विहार समिति की धोखाधड़ी

पिछले सप्ताह रेल निगम सहकारी समिति के खिलाफ भी धोखाधड़ी का मामला सामने आया। इस समिति पर शुरू में 72 लाख रुपये की ठगी का आरोप था, लेकिन जांच में यह राशि 21 लाख रुपये पाई गई। परिषद ने इस मामले में भी मुकदमा दर्ज कराया है। इसके अलावा, तुर्मांचल विहार सहकारी समिति के खिलाफ भी धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। इन समितियों ने लोगों को सस्ते प्लॉट और फ्लैट का लालच देकर उनसे पैसे ऐंठे, लेकिन न तो जमीन दी गई और न ही कोई निर्माण कार्य शुरू हुआ।

शिकायतों का खुलासा देरी से

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सहकारी अधिकारी अरिमर्दन गौड़ ने बताया कि ज्यादातर मामलों में लोग वर्षों बाद शिकायत लेकर परिषद के पास पहुंचते हैं, जिसके कारण ठगी का खुलासा देरी से होता है। कई बार लोग बिना दस्तावेजों की जांच किए या परिषद से पुष्टि किए बिना पैसा लगा देते हैं। जब उन्हें कोई रिटर्न नहीं मिलता या जमीन का कब्जा नहीं मिलता, तब वे शिकायत दर्ज कराते हैं। अधिकारी ने कहा कि ऐसी धोखाधड़ी से बचने के लिए लोगों को किसी भी योजना में निवेश करने से पहले पूरी जानकारी लेनी चाहिए और परिषद से संपर्क करना चाहिए।

परिषद की कार्रवाई और सलाह

आवास विकास परिषद ने ठगी के इन मामलों को गंभीरता से लिया है। तीन सहकारी समितियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के साथ-साथ अन्य समितियों की भी जांच की जा रही है। परिषद ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी सहकारी समिति या बिल्डर के साथ डील करने से पहले उनके दस्तावेजों की जांच करें और परिषद के कार्यालय से योजना की वैधता की पुष्टि कर लें।

सामाजिक जागरूकता की जरूरत

यह मामला न केवल व्यक्तिगत लालच और धोखाधड़ी का है, बल्कि समाज में जागरूकता की कमी को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को आकर्षक ऑफर के झांसे में आने से पहले संबंधित प्राधिकरण से जानकारी लेनी चाहिए। साथ ही, परिषद और पुलिस को ऐसी फर्जी समितियों के खिलाफ और सख्ती से कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की ठगी को रोका जा सके।

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