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नई दिल्ली/ वाशिंगटन, वाईबीएन डेस्क। भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर टल रही टकराहट अब अपने चरम पर पहुंच रही है। फिलहाल यह तनाव खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। अमेरिकी राजनयिक और राजनेता अपने जहरीले बयानों से इस तनाव में आग में घी का काम कर रहे हैं। इस बीच अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने को लेकर एक बार फिर प्रतिक्रिया आई है। साउथ कैरोलिना से अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि भारत, व्लादिमीर पुतिन को सपोर्ट करने की कीमत चुका रहा है। ग्राहम ने चीन और ब्राजील को सख्त चेतावनी भी दी है। उधर,अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड डी. वोल्फ नेकहा कि टैरिफ से ब्रिक्स को और मजबूती मिलेगी।
'पुतिन की युद्ध मशीन को मदद'
सीनेटर ग्राहम ने भारत, चीन और ब्राजील पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये देश रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को सपोर्ट कर रहे हैं। ग्राहम ने सोशल मीडिया एक्स पोस्ट के जरिए कहा, ''भारत, चीन, ब्राजील और अन्य देश जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को सहारा दे रहे हैं। अब आपको कैसा लग रहा है? आपकी खरीदारी के कारण बच्चों समेत निर्दोष नागरिक मारे गए हैं। भारत पुतिन का समर्थन करने की कीमत चुका रहा है। बाकी बचे हुए देशों को भी जल्द ही भुगतना पड़ेगा।''
भारत पर 50% टैरिफ से ब्रिक्स जैसे समूह मजूबत होंगे
अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड डी. वोल्फ ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि भारत पर 50% टैरिफ लगाने का ट्रंप प्रशासन का फैसला ब्रिक्स जैसे समूहों को सशक्त बनाएगा क्योंकि भारत अपने निर्यात ब्रिक्स देशों को बेच सकता है। वोल्फ ने रूसी तेल खरीदने के लिए नई दिल्ली पर दंडात्मक टैरिफ लगाने की वाशिंगटन की आर्थिक नीति की आलोचना की।
मास्को के साथ भारत के संबंध सोवियत काल से भी आगे
उन्होंने दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश और सबसे बड़े बाजार के रूप में भारत के बढ़ते आर्थिक और जनसांख्यिकीय महत्व की ओर इशारा किया। वोल्फ ने कहा कि मास्को के साथ भारत के संबंध सोवियत काल से भी आगे हैं और अमेरिका यहां एक बिल्कुल अलग प्रतिद्वंद्वी के साथ खेल रहा है। उन्होंने समझाया, "अमेरिका जो कर रहा है, वह ब्रिक्स को पश्चिम के मुकाबले एक और भी बड़े, अधिक एकीकृत और सफल आर्थिक विकल्प के रूप में विकसित करने की एक गर्मजोशी भरी कोशिश है।"
वित्त मंत्रालय ने नई टैरिफ चुनौतियों पर क्या कहा
उधर, भारत पर नए अमेरिकी टैरिफ लागू होने के बाद, वित्त मंत्रालय ने कहा कि हालांकि इसका तत्काल प्रभाव सीमित लग सकता है, लेकिन व्यापक अर्थव्यवस्था पर इसके व्यापक प्रभाव चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं और इस पर सावधानीपूर्वक ध्यान देने की आवश्यकता है। मंत्रालय ने आगे कहा कि अगर इन बाधाओं का अच्छी तरह से प्रबंधन किया जाए, तो अर्थव्यवस्था और मज़बूत और अधिक लचीली बन सकती है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि अगर बड़ी और आर्थिक रूप से मज़बूत कंपनियां अल्पकालिक बोझ का ज़्यादातर हिस्सा उठाती हैं, तो संबंधित उद्योगों में छोटे और मध्यम व्यवसायों के पास उबरने और विकास करने के बेहतर अवसर होंगे। मंत्रालय के अनुसार, यह राष्ट्रीय हित में प्राथमिकता तय करने और कार्य करने का समय है। India-Russia oil trade | india america relationship | tarrif | america news | america tariff | America vs India: US Senator on India