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नई दिल्ली, वाईबीएन डेस्क। पी1 और प2 अमेरिकी इमिग्रेशन केस धारक हजारों अफगान नागरिकों का मामला अभी तक पूरी तरह से अनिश्चिततामें में घिरा है। व्हाइट हाउस की यात्रप पर प्रतिबंध लगाने संबंधी हालिया घोषणा के बाद ऐसे अफगानों को अमेरिकी सरकार से जवाब मिलने की प्रतीक्षा है।
पाकिस्तान जैसे तीसरे देश में फंसे हैं अफगान
इन अफगानों में से कई व्यक्ति अमेरिकी आश्वासन के भरोसे पाकिस्तान जैसे तीसरे देश में तीन वर्ष से ज्यादा समय से फंसे हुए हैं। अमेरिका ने उनके मामले की प्रक्रिया का भरोसा दिया था। ऐसे ही लोगों में कुछ ने बताया कि नए यात्रा प्रतिबंध ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिकी वादे पर तीसरे देश में आए अफगान
एक अमेरिकी इमिग्रेट केस होल्डर मोहम्मद जाविद कोहसारी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि पी1 और प2 केस धारक यात्रा प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगे। इसका कारण यह है कि करीब तीन वर्ष पहले अमेरिकी वादे के आधार पर हम तीसरे देश में आए। पाकिस्तान में शरणार्थी अनगिनत समस्याओं से घिरे हैं।
तीसरे देश में अपने मामले की प्रक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं शरणार्थी
एक अन्य अमेरिकी इमिग्रेशन धारक ने कहा कि पाकिस्तान और अन्य तीसरे देश में में हम और दूसरे अफगान अपने मामले की प्रक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हमें दूतावास साक्षात्कार और स्वास्थ्य जांच समेत अधिकांश कानूनी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है।
अमेरिका ने कहा, बुरे लोगों को अमेरिका से बाहर रखना उद्देश्य
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्यारह देशों के नागरिकों के साथ ही अफगान नागरिकों की यात्रा पर प्रतिबंध की घोषणा की थी। ट्रंप ने कहा कि इन देशों में घरेलू स्थिति नियंत्रण में नहीं है। उन्होंने कहा कि इस प्रतिबंध का उद्देश्य बुरे लोगों को अमेरिका से बाहर रखना है।
संरा ने मानव गरिमा का सम्मान करने की सलाह दी
संयुक्त राष्ट्र ने जोर देकर कहा है कि हर देश को जहां अपनी सीमा का प्रबंधन करने का अधिकार है, वहीं लागू की जा रही किसी प्रणाली में मानव गरिमा का आदर किया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीपन दुजारिक ने कहा, 'वैश्विक रूप से हमारी राय यही रही कि इस संबंध में स्थापित कोई भी प्रणाली मानव गरिमा को संरक्षित करे।'