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BLO की मौतों पर AAP का प्रदेशव्यापी विरोध : लखनऊ में श्रद्धांजलि सभा, परिवार को नौकरी और 1 करोड़ मुआवजा की मांग

मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान में सरकारी दबाव के चलते देशभर में अभी तक 25 से अधिक बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) की मौतों को आम आदमी पार्टी (AAP) ने गंभीर संवैधानिक संकट बताया है।

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Deepak Yadav
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बीएलओ की मौतों पर आप का प्रदेशव्यापी विरोध Photograph: (YBN)

लखनऊ, वाईबीएन संवाददाता। मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान में सरकारी दबाव के चलते देशभर में अभी तक 25 से अधिक बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) की मौतों को आम आदमी पार्टी (AAP) ने गंभीर संवैधानिक संकट बताया है। इन घटनाओं के विरोध और दिवंगत अधिकारियों के लिए रविवार को प्रदेश के सभी जिलों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। इसी क्रम में लखनऊ में शहीद स्मारक निकट रेजिडेंसी भवन पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने मोमबत्ती जलाकर मृत बीएलओ को श्रद्धांजलि दी।

बीएलओ की मौतें हादसा नहीं, सिस्टम की हत्या

प्रदेश प्रवक्ता प्रिंस सोनी ने कहा कि बीएलओ की ये मौतें कोई सामान्य घटना नहीं हैं, बल्कि सरकार की सोची-समझी दमनकारी नीति का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार मतदाता सूची में हेरफेर कर अपनी सत्ता बचाने के लिए बीएलओ को अमानवीय परिस्थितियों में काम करने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने सभी मृत बीएलओ के परिजनों को 1 करोड़ मुआवजा और एक सदस्य को तत्काल सरकारी नौकरी देने सभी घटनाओं की उच्च-स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की।

संविधान और मताधिकार पर हमला

सोनी ने कहा कि यह लोकतांत्रिक ढांचे और मताधिकार की जड़ें हिलाने वाली घटनाएं हैं। सरकार की चुप्पी सिद्ध करती है कि यह दुर्घटना नहीं, बल्कि सत्ता के संरक्षण में किया गया सुनियोजित हमला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौतों का सिलसिला नहीं रुका तो आम आदमी पार्टी प्रदेश में आंदोलन शुरू करेगी।

चुनावी घोटाले ने ली बीएलओ की जानें

जिला अध्यक्ष इरम रिजवी ने कहा कि देश के बीएलओ बिना साधन, बिना सुरक्षा और बिना मानवीय व्यवहार के मतदाता सूची सत्यापन के नाम पर जान गंवा रहे हैं और सरकार मौन है। उन्होंने कहा कि इन मौतों की जिम्मेदार वही व्यवस्था है जो कर्मचारियों को इंसान नहीं, उपकरण समझती है। आप नेत्री प्रियंका श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि मोदी और चुनाव आयोग की मिलीभगत से SIR एक चुनावी घोटाला है। इसमें दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के बहुतायत में वोट काटे जा रहे हैं। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

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