/young-bharat-news/media/media_files/2025/11/30/24-aug-14-2025-11-30-09-46-55.png)
प्रतीकात्मक Photograph: (सोशल मीडिया)
लखनऊ, वाईबीएन संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश में संगठित अपराधों पर नकेल कसने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने गृह सचिव स्तर के अधिकारी का हलफनामा मांगा है और पूछा है कि क्या (1) जिले या कमिश्नरेट से इकट्ठा किया गया डेटा, जिसके आधार पर विभाग इस नतीजे पर पहुंचा है कि गैंगस्टर्स एक्ट के तहत काम करने वाला कमिश्नरेट सिस्टम, नियम 5(3)(a) के तहत जरूरी संयुक्त बैठक से जिला मजिस्ट्रेट को बाहर रखना सही है। यह राज्य और नागरिकों के हित में है, और उद्देश्य पूरा करता है। (2) क्या जिन जिलों में कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है, उन जिलों की तुलना में जहां कमिश्नरेट प्रणाली नहीं अपनाई गई है, का डेटा , तुलनात्मक अध्ययन का विवरण है और (3) पुलिस अधिकारियों को दिए गए किसी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम का विवरण, जिन्हें जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा पूर्व में किए गए कार्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया गया है, साथ ही राज्य सरकार द्वारा किए गए किसी भी अध्ययन का विवरण जो यह दर्शाता है कि गृह विभाग इच्छित उद्देश्य को प्राप्त करने में सफल रहा है या नहीं।
इन बिंदुओं पर कोर्ट ने मांगा हलफनामा
कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (अभियोजन)को पिछले 10 वर्षों के उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामलों के संबंध में व्यापक जिलावार डेटा पेश करने का भी निर्देश दिया है। और (i) पंजीकृत मामलों की संख्या; (ii) फाइल की गई चार्जशीट की संख्या; (iii) कितने लोगों को सजा मिली; और (iv) चार्जशीट वाले आरोपियों के बरी होने की संख्या, नॉन-कमिश्नरिएट जिले के मुकाबले तुलना के साथ, हलफनामा मांगा है।
सिस्टम में सुधार और पॉलिसी से जुड़े फैसलों पर भी जानकारी मांगी
साथ ही कहा कि रिपोर्ट में यह भी बताया जाएगा कि होम डिपार्टमेंट ने पुलिस के काम को बेहतर बनाने के लिए क्या सिस्टम में सुधार और पॉलिसी से जुड़े फैसले लिए हैं, अगर कोई हैं, जहा पुलिस की शक्तियों का बहुत ज्यादा गलत इस्तेमाल, खासकर गैंग-चार्ट को बिना सोचे-समझे मंजूरी देने और गैंगस्टर्स एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू करने के मामले में, सामने आया है।
कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी, उत्तर प्रदेश सरकार को अनुपालनार्थ भेजने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने राजेंद्र त्यागी व दो अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
कोर्ट के निर्देश पर प्रमुख सचिव गृह ने हलफनामा दाखिल कर जानकारी दी कि जिन जिलों में पुलिस कमिश्नरेट लागू किया गया है वहां गैंगस्टर एक्ट के तहत पुलिस कमिश्नर व उप पुलिस कमिश्नर की संयुक्त बैठक होगी। जिला अपराध प्रशासन के मुखिया जिलाधिकारी को इस बैठक से अलग किया गया है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले जिलों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है। ऐसा करने का राज्य सरकार को अधिकार है। आर्थिक अपराधो, संगठित अपराधों, रियल इस्टेट व साइबर अपराधों पर कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नरेट को मजिस्ट्रेट का अधिकार दिया गया है।
कानून के समक्ष सभी नागरिकों को समानता का अधिकार
कोर्ट ने कहा कि दशकों तक बड़े माफियाओं के मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं होती और पुलिस को जवाबदेही तय नहीं होती, होती भी है तो इंस्पेक्टर रैंक के नीचे के अधिकारियों की होती है। जमानत शर्तों का उल्लघंन किया जाता है, आए दिन अभियुक्त केस सुनवाई टलवा लेते हैं और जे डी या डी जी सी प्रभावी पक्ष नहीं रखने, जमानत निरस्त करने की कार्रवाई नहीं की जाती। इसे रेग्यूलेट करने की आवश्यकता है।
कोर्ट ने कहा प्रदेश में कल्याणकारी राज्य है। कानून के समक्ष सभी नागरिकों को समानता का अधिकार है। इसके बावजूद अपराधों की सेलेक्टिव विवेचना की जाती है । सरकार को सिस्टम तैयार कर जवाबदेही तय करनी चाहिए। जिसपर सचिव गृह का हलफनामा मांगा है।
यह भी पढ़ें Crime News: जिलाधिकारी बरेली के प्रयागराज आवास में सेंध, दोमंजिला भवन का ताला तोड़कर चोरी
Allahabad High Court | Allahabad High Court hearing | court | latest up news | up news | UP news 2025 | up news hindi | up news in hindi
/young-bharat-news/media/agency_attachments/2024/12/20/2024-12-20t064021612z-ybn-logo-young-bharat.jpeg)
Follow Us
/young-bharat-news/media/media_files/2025/04/11/dXXHxMv9gnrpRAb9ouRk.jpg)